Kalyan Singh News: जब गृहमंत्री से CM कल्याण की सरकार ने कहा- आपके भेजे अर्धसैनिक बल अयोध्या में शराब पीकर हंगामा कर रहे


लखनऊ
उत्तर प्रदेश में उन दिनों कारसेवकों का आंदोलन पूरे चरम पर था। 1992 के उन दिनों प्रदेश में कल्याण सिंह सीएम थे और देश में पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री। केंद्र सरकार के गृहमंत्री पद का कामकाज कांग्रेस के नेता एसबी चव्हाण के पास था। अयोध्या में कारसेवा के लिए 6 दिसंबर की तारीख तय थी और कल्याण सिंह केंद्र को इस बात का भरोसा दे रहे थे कि वह विवादित ढांचे को बचाने के हर उपाय करेंगे। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा था कि वह कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश किसी सूरत में नहीं देंगे।

कल्याण ने विवादित ढांचे की सुरक्षा का वादा राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में किया था। हालांकि उनके गोली ना चलाने वाले आदेश की बात केंद्र सरकार के लिए एक अजीब स्थिति बना रही थी। केंद्र की सरकार को कल्याण पर शक सा था और इसीलिए प्रदेश के अनुरोध के बिना ही केंद्रीय गृह मंत्रालय अयोध्या में बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों को भेज रहा था। ये बल उत्तर प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी भेजे जा रहे थे। केंद्र सरकार पर ये आरोप लग रहा था कि वह कारसेवा रोकने की कोशिश कर रही है, वहीं प्रदेश की कल्याण सरकार ये आरोप भी लगा रही थी कि जिन जवानों को उनके आदेश के बिना भेजा जा रहा है वो अयोध्या के तमाम इलाकों में शराब पीकर हंगामा कर रहे हैं।

केंद्रीय बलों पर लगे हंगामा और बिजली चोरी के आरोप
ये पहली बार था, जब देश के अर्धसैनिक बलों पर इस तरह का कोई आरोप लगाया जा रहा था। आरोपों की तस्दीक करते कल्याण सिंह खुद मुख्यमंत्री कार्यालय से केंद्र को पत्र लिख रहे थे। ऐसा ही एक पत्र उन्होंने 30 नवंबर 1992 को प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लिखा। कल्याण ने इस पत्र में अर्धसैनिक बलों पर गंभीर आरोप लगाए। आरोपों में हंगामा करने से लेकर डीएम तक का आदेश ना मानने की बात कही गई थी। पत्र के बाद कल्याण सिंह की सरकार ने केंद्र को जिलाधिकारी फैजाबाद (अब अयोध्या) की एक रिपोर्ट भी भेजी। रिपोर्ट में लिखा था कि केंद्रीय बल शराब पीकर अयोध्या के तमाम इलाकों में हंगामा करते हैं। इसके अलावा केंद्रीय बलों पर बिजली चोरी समेत तमाम अन्य आरोप भी लगाए गए थे।

गृहमंत्री ने दिया जवाब- आपके इंतजाम नाकाफी हैं
पत्र का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री 5 दिसंबर 1992 को एक जवाबी चिट्ठी लिखी और कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस के लिए जो भी इंतजाम हो रहे हैं, वो नाकाफी हैं। गृहमंत्री ने कल्याण को चेतावनी भी दी और ये भी कहा कि वो केंद्रीय बलों का बेहतर ढंग से इस्तेमाल करें। गृहमंत्री ने चिट्ठी में यह भी लिखा कि अगर किसी तरह की अप्रिय स्थिति बनती है तो प्रदेश की पुलिस हालात नियंत्रित करने में नाकाफी साबित होगी। हालांकि सब के बावजूद कल्याण अपने विरोधी रवैये पर अड़े रहे। वो इस बात पर आश्वस्त थे कि राज्य पुलिस ढांचे की सुरक्षा के लिए सभी तरह से प्रतिबद्ध होगी। कल्याण के रवैये से इतर केंद्र अयोध्या और आसपास के इलाके में केंद्रीय बलों की तैनाती करता रहा। सारे इंतजामों के बावजूद 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे का विध्वंस हो गया और इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कल्याण ने अपनी कुर्सी छोड़ दी।

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