Deal With Stubborn Child: क्या आपका भी बच्चा करता है सबके सामने जिद, तो फॉलो करें टिप्स


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Deal With Stubborn Child

Deal With Stubborn Child: बच्चों को समझना और संभालना यह दोनों ही चीजें बेहद मुश्किल होती हैं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है।  बच्चे कब और किसके सामने, किस बात पर जिद करने‌ लगे इसका कोई भरोसा नहीं है। वह हालात बड़े ही मुश्किल भरे होते हैं, जब आपका बच्चा कई लोगों के बीच में गुस्सा या जिद करने लगता है। ऐसे में आपको समझ में नहीं आता कि आप करें तो आखिर क्या करें। बच्चे के जिद्द से केवल आप ही परेशान नहीं होते, बल्कि सामने खड़े और लोगों को भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में बच्चे को संभालना जरूरी बन जाता है। लेकिन लोगों के बीच में आप अपने बच्चे को ना तो थप्पड़ मार सकते हैं और ना ही चिल्ला सकते हैं, जो एक तरह गलत भी है। ऐसे में आप कुछ तरीकों को आजमाकर अपने बच्चे के जिद और गुस्से पर काबू कर सकते हैं।

अपने बच्चे की बात को समझें

बच्चा अकेले में जिद्द करे चाहे किसी और के सामने, लेकिन इसका कोई कारण जरूर होता है। ‌इसलिए पहले उसकी इस बात को समझें कि आखिर आपका बच्चा क्या कहने की कोशिश कर रहा है। अगर आप अपने बच्चे की जिद्द की वजह को समझ जाएंगे तो, उसको भी समझाना आपके लिए आसान हो सकता है।

बच्चे के साथ ना करें बहस

जब आपका बच्चा जिद्द कर रहा हो, तो उसके साथ शांति से पेश आएं। कई ऐसे भी पेरेंट्स होते हैं, जो बच्चे के जिद्द करने पर खुद भी चिल्लाना और बहस करना शुरू कर देते हैं, जिसकी वजह से वो और भी चिड़चिड़ा बन जाता है। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चे को शांत कराने के लिए प्यार से और शांति के साथ बात करें।

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बच्चे को चुप कराने के लिए झूठे प्रॉमिस ना करें

अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने बच्चे को भीड़ में चुप कराने के लिए कोई झूठा प्रॉमिस कर देते हैं, जैसे कि वह खिलौने या चॉकलेट दिलाएंगे, लेकिन फिर वह इस बात को भूल जाते हैं, जिसकी वजह से बच्चा बाद में उन बातों को याद कर-करके रोता है और उसके अंदर धीरे-धीरे जिद्द और गुस्सा पनपने लगता है, जो कि अगली बार फिर किसी के उसका गुस्सा फूट सकता है।

अपने बच्चे को सम्मान दें

अगर आप यह चाहते हैं कि आपका बच्चा किसी के सामने भी आपकी बेइज्जती ना कराए और जिद्द ना क,रें तो उसका और उसकी बातों का सम्मान करें। हम सोचते हैं कि केवल हमें ही इज्जत की जरूरत होती है, लेकिन बच्चे भी चाहते हैं कि उनसे हर कोई अच्छे से पेश आए और उसकी बात को समझे। इसलिए बच्चे को आदेश देने की जगह उसकी बातों को समझने में ही समझदारी है।

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