Commonwealth Games: भारत ने मेडल के साथ की थी शानदार शुरुआत, गोल्ड के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार


हाइलाइट्स

भारत के 200 से अधिक खिलाड़ी गेम्स में हो रहे हैं शामिल
1930 में पहली बार हुआ था कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन
बर्मिंघम में होने वाला आयोजन गेम्स का ओवरऑल 22वां सीजन

नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games 2022) के नए सीजन का मंच सज चुका है. 28 जुलाई से इसकी शुरुआत बर्मिंघम में होने जा रही है. भारत सहित 72 देशों के 5 हजार से अधिक एथलीट इसमें शामिल हो रहे हैं. गेम्स के इतिहास को देखें, तो इसकी शुरुआत 1930 में हुई. उस समय इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से जाना जाता था. पहली बार इसका आयोजन कनाडा के हेमिल्टन (ओंटारियो) में हुआ. भारतीय खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था. पहली बार भारतीय खिलाड़ी लंदन में 1934 में हुए गेम्स में उतरे. भारत के 6 खिलाड़ी सिर्फ 2 खेलों एथलेटिक्स और कुश्ती में शामिल हुए. पहलवान राशिद अनवर ने 74 किग्रा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत को गेम्स का पहला मेडल दिलाया था. इस तरह से भारत ने गेम्स की शुरुआत मेडल के साथ की थी. हालांकि गोल्ड मेडल के लिए हमें लंबा इंतजार करना पड़ा.

राशिद अनवर कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा ओलंपिक में भी उतरे. उन्होंने 1936 बर्लिन ओलंपिक में हिस्सा लिया. हालांकि वे यहां मेडल नहीं जीत सके. 1940 ओलंपिक की भी वे तैयारी कर रहे थे. लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के कारण गेम्स का आयोजन नहीं हो सका. युद्ध के दौरान अनवर ने एम्बुलेंस में बतौर ड्राइवर काम किया. ऐसे में उन्हें मैदान के बाहर भी सराहनीय काम के लिए जाना जाता है. गेम्स के इतिहास की बात करें तो, भारत ने रेसलिंग में 43 गोल्ड सहित अब तक कुल 102 मेडल जीते हैं. अब तक सिर्फ 3 ही खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने 100 से अधिक मेडल जीते हैं.

मिल्खा सिंह ने दिलाया पहला गोल्ड
भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला गोल्ड मेडल हासिल करने लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. मिल्खा सिंह ने पहला गोल्ड 1958 में कार्डिफ में दिलाया. उन्होंने 440 यार्ड्स में यह मेडल अपने नाम किया. इसी गेम्स में लीला राम ने भी रेसलिंग में गोल्ड पर कब्जा किया था. एथलेटिक्स के इतिहास को देखें, तो भारत ने अब तक 5 गोल्ड सहित कुल 28 मेडल जीते हैं.

1966 में पहली बार मिले 10 मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास की बात करें, तो भारत पहली बार 1966 में मेडल के दोहरे अंक तक पहुंचा. तब उसे 3 गोल्ड, 4 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज मेडल मिले थे. इस दौरान 7 मेडल कुश्ती के खिलाड़ियों ने जीते. बिशम्भर सिंह, मुखतियार सिंह और भीम सिंह ने गोल्ड पर कब्जा किया. वहीं शेमराव साबले और रंधावा सिंह ने सिल्वर मेडल जीता. इसके अलावा हुकुम सिंह और विश्वनाथ सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. एथलेटिक्स के हैमर थ्रो में प्रवीण कुमार ने सिल्वर जीता. बैडमिंटन में दिनेश खन्ना को ब्रॉन्ज मेडल मिला. यह गेम्स का भारत का बैडमिंटन में पहला मेडल भी था. वहीं वेटलिफ्टिंग में मोहन लाल घोष ने सिल्वर हासिल किया.

ओवरऑल यह 22वां आयोजन, भारत 4 बार नहीं उतरा
बर्मिंघम में होने वाला कॉमनवेल्थ गेम्स ओवरऑल 22वां आयोजन है. भारत की बात की जाए, तो वह इस दौरान 4 बार नहीं उतरा. 1930 के अलावा 1950 में न्यूजीलैंड में, 1962 में पर्थ और 1986 में स्कॉटलैंड में हुए गेम्स में हमारे खिलाड़ी नहीं उतरे. गेम्स के इतिहास की बात करें, तो भारत सिर्फ एक बार 100 से अधिक मेडल जीतने में सफल रहा है. 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज मेडल सहित 101 मेडल जीते थे. अंतिम बार 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए गेम्स में भारत को 26 गोल्ड, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज सहित 66 मेडल मिले थे.

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गेम्स की शुरुआत 28 जुलाई से होने जा रही है. भारत के कुल 215 खिलाड़ी 16 खेलों में अपना दमखम दिखाएंगे. हालांकि शूटिंग के हटने से भारत को बड़ा झटका लगा है. गेम्स के इतिहास को देखें, तो भारत ने शूटिंग में सबसे अधिक 135 मेडल जीते हैं. इसमें 63 गोल्ड, 44 सिल्वर और 28 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं.

भारत ने ओवरऑल कॉमनवेल्थ गेम्स में अब तक 181 गोल्ड, 173 सिल्वर और 149 ब्रॉन्ज मेडल सहित 503 मेडल अपने नाम किए हैं. इस बार पहली बार महिला क्रिकेट को भी इसमें शामिल किया गया है. हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम मेडल की दावेदार भी है.

Tags: Birmingham, Commonwealth Games, Commonwealth Games Federation, Milkha Singh



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