फ़ैक्ट-चेक: PM मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भजन से कुपोषण को कम किया जा सकता है?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त को कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 92वें संस्करण में लोगों से वार्षिक ‘पोषण माह’ में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया. 2018 से हर साल सितंबर महीने को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जाता है.

अपने आधे घंटे के संबोधन में पीएम मोदी ने अलग-अलग विषयों पर बात की जिसमें उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कुपोषण मिटाने के लिए किस तरह इनोवेटिव कैम्पैन्स चलाए जा रहे हैं. इस कार्यक्रम के 2 दिन बाद यानी, 30 अगस्त को द वायर साइंस पर इस बारे में “प्रधानमंत्री जी, कुपोषण की समस्या भजन से नहीं भोजन से दूर होती है” टाइटल से एक ओपिनियन पीस पब्लिश किया गया.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में सेंटर ऑफ़ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ के पीएचडी स्कॉलर पंकज कुमार मिश्रा द्वारा लिखे गए इस आर्टिकल को ‘द वायर’ ने ट्विटर पर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भजन से कुपोषण को कम किया जा सकता है.” इस ट्वीट को 1400 से ज़्यादा लाइक्स और 400 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया.


पश्चिम बंगाल की महिला और बाल विकास मंत्री डॉ शशि पांजा ने ‘द वायर’ के ट्वीट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा, “प्रिय पीएम @narendramodi, स्वस्थ भोजन की उपलब्धता और आसान पहुंच से कुपोषण का बोझ कम होगा, भजन से नहीं.” देश के बच्चों के जीवन के विषय पर उन्होंने पीएम को “एक बड़ी विफलता” भी कहा.

उप्साला विश्वविद्यालय में पीस एंड कॉनफ्लिक्ट रिसर्च के प्रोफ़ेसर अशोक स्वैन ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा, “पीएम मोदी कहते हैं कि भजन (हिंदू भक्ति गीत) गाने से कुपोषण की समस्या का समाधान हो सकता है.” उनके ट्वीट को 10 हज़ार से ज़्यादा लाइक्स और 1 हज़ार से ज़्यादा बार रिट्वीट किया गया.


31 अगस्त को तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता K.T. रामा राव ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए कहा, “मुझे सच में उम्मीद है कि ये एक टेलीप्रॉम्प्टर टाइपो था जहां भोजन को भजन के रूप में टाइप किया गया होगा.”


फ़ैक्ट-चेक

‘द वायर साइंस’ के लिए पंकज कुमार मिश्रा के ओपिनियन पीस का बहुत ध्यान से विश्लेषण करने पर हमने नोटिस किया कि लेखक का तर्क है कि पीएम मोदी ने ऐसा कहा, “भजन आयोजित करने और भक्ति गीत गाने से कुपोषण के बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है.” नीचे आर्टिकल में सबंधित इस हिस्से को देखा जा सकता है.


हमें पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफ़िशियल यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो मिला जिसमें उन्हें कुपोषण को मिटाने के लिए इनोवेटिव कैम्पैन्स के बारे में बात करते हुए देखा जा सकता है. चार मिनट की इस क्लिप में पीएम मोदी तीन राज्यों – असम, मध्य प्रदेश और झारखंड के बारे में बात करते हैं. उनका कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन नए-नए तरीके लेकर आए हैं.

इस वीडियो में 1 मिनट पर मध्य प्रदेश के बारे में बात करते हुए पीएम कहते हैं, “आप कल्पना कर सकते हैं क्या कुपोषण दूर करने में गीत, संगीत और भजन का भी इस्तेमाल हो सकता है?” उन्होंने आगे कहा, “मध्य प्रदेश के दतिया ज़िले में “मेरा बच्चा अभियान!” इस ‘मेरा बच्चा अभियान’ में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया. इसके तहत ज़िले में भजन-कीर्तन आयोजित हुए, जिसमें पोषण गुरु कहलाने वाले शिक्षकों को बुलाया गया. एक मटका कार्यक्रम भी हुआ, इसमें महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्र के लिए मुट्ठी भर अनाज लेकर आती हैं, और इसी अनाज से शनिवार को बालभोज का आयोजन होता है.”

हमें ऑल इंडिया रेडियो (AIR) की वेबसाइट के माध्यम से अंग्रेजी अनुवाद और एड्रेस के हिंदी ट्रांसक्रिप्शन का एक्सेस मिला. नीचे वीडियो के इस हिस्से का हिंदी ट्रांसक्रिप्ट देखा जा सकता है:


आकाशवाणी की वेबसाइट पर मौजूद इस स्क्रिप्ट का अंग्रेज़ी अनुवाद अच्छी तरह नहीं किया गया था. हालांकि, पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफ़िशियल यूट्यूब चैनल पर एक अलग अनुवाद किया गया था जो कि असली हिंदी भाषण के मुताबिक ही था.

वीडियो के इस हिस्से को देखकर ये बिल्कुल साफ है कि प्रधानमंत्री ने ये नहीं कहा था कि भजन से कुपोषण की समस्या का समाधान हो सकता है. उनका भाषण इस बात पर केंद्रित था कि कैसे स्थानीय प्रशासन कुपोषण से लड़ने के लिए अनोखे समाधान लेकर आए थे, जिसमें भजन-कीर्तन भी एक महत्वपूर्ण उपाय था. असल में, जागरूकता बढ़ाने के लिए अलग-अलग आर्ट्स फॉर्म्स का इस्तेमाल करना सामान्य है. जलवायु परिवर्तन या कोविड -19 के खिलाफ़ लड़ाई में हमें इसके कई उदाहरण मिल सकते हैं.

मेरा बच्चा अभियान

मेरा बच्चा अभियान के बारे में और जानकारी के लिए ऑल्ट न्यूज़ ने दतिया के ज़िला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अरविंद उपाध्याय से संपर्क किया. अरविंद ने बताया, “हमने दोपहर में इन भजन सेशंस का आयोजन किया. उस वक्त यहां की महिलाओं के पास सबसे ज़्यादा खाली समय होता है. हमने देखा कि कोई भी अपने खाली समय में लेक्चर सुनना नहीं चाहता था, इसलिए हमने उन्हें एक जगह इकट्ठा करने के लिए भजन गाए. फिर हमने पोषण पर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘सुपोषण गीत’ का इस्तेमाल किया.”

उन्होंने आगे कहा, “हमने 2019 के सितंबर में शुरू किया था. शुरुआती चरण में चीजें व्यवस्थित नहीं थीं, लेकिन आज हमारे पास सब कुछ क्रम में है. दर्शकों को इकट्ठा करने के लिए भजन का इस्तेमाल किया जाता है. पोषण गुरु स्कूल के शिक्षक होते हैं जो स्कूल की प्रार्थना के बाद या लेक्चर के बाद पोषण के बारे में बात करते हैं. योग्य स्वयंसेवक भी हैं जिन्हें पोषण गुरु माना जाता है. हमारे पास पोषण क्लब भी हैं जहां हम लोगों को आधार ग्रहण करवाते हैं. कुपोषण को मिटाने के हमारे प्रयासों के लिए हमें इस साल एक पुरस्कार भी मिला है.”

दतिया जीएल को 21 अप्रैल, 2022 को पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में बहुत अच्छा काम करने के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार मिला था.

हमारे आग्रह पर, अरविंद उपाध्याय ने इस तरह के कार्यक्रम का एक वीडियो हमारे साथ शेयर किया जहां महिलाएं हरी सब्जियां खाने के लाभ गाकर बता रही हैं.

हमने अरविंद उपाध्याय से पूछा कि क्या कुपोषण में कमी लाने का मुख्य उपाय भजन-कीर्तन सेशन था, उन्होंने कहा, “ये उन कई उपायों में से एक था जिनका इस्तेमाल हम जागरूकता बढ़ाने के लिए करते थे.”

उन्होंने हमारे साथ, डिटेल में ‘मेरा बच्चा अभियान’ कार्यक्रम का एक प्रेजेंटेशन भी शेयर किया. इस प्रेजेंटेशन में ‘पोषण गुरु’ और ‘भजन कीर्तन मंडली’ का कई बार ज़िक्र किया गया है.

ग़लत सूचना का सिलसिलेवार विश्लेषण

ऐसे कई फ़ैक्टर्स हैं जिनकी वजह से पीएम के भाषण के बारे में ग़लत सूचना वायरल हुई. ये कार्यक्रम 28 अगस्त को प्रसारित हुआ और 30 अगस्त को ‘द वायर साइंस’ पर ओपिनियन पीस पब्लिश हुआ. इन दो दिनों के बीच सोशल मीडिया पर कोई ‘आक्रोश’ नहीं फैला था.

भ्रामक कैप्शन और हेडलाइन

‘द वायर’ के ट्वीट का कैप्शन देखना ज़रूरी है. कैप्शन में कहा गया है कि पीएम ने कहा, “…भजन समाधान का हिस्सा हो सकता है…” लेकिन इस कैप्शन में भाषण का सार नहीं बताया गया है. प्रधानमंत्री उन अनोखे तरीकों के बारे में बात कर रहे थे जो स्थानीय प्रशासन, कुपोषण से लड़ने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें से भजन-कीर्तन को भी कुपोषण पर जानकारी देने के लिए एक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया था. इस महत्वपूर्ण जानकारी को = कैप्शन में नहीं बताया गया और इसलिए गलत सूचना का एक चक्र शुरू हुआ.

ट्विटर पर एक एडवांस सर्च करने से ‘द वायर’ द्वारा ट्वीट में ग़लत व्याख्या किए जाने का सबूत आसानी से मिल जाता है. भजन के बारे में पहला ट्वीट ऑल इंडिया रेडियो न्यूज़ ने 28 अगस्त को किया था और इस ट्वीट को सिर्फ 20 रीट्वीट मिले हैं. इसी बीच, ‘द वायर’ द्वारा 30 अगस्त को किए गए ट्वीट को 500 से ज़्यादा कोट ट्वीट और 400 से ज़्यादा रीट्वीट मिले हैं. इससे पता चलता है कि लोग आर्टिकल को पढ़े बिना ही अपने निष्कर्ष पर पहुंच गए थे. ये एक सामान्य घटना है कि ट्विटर पर लोग बिना किसी आर्टिकल को पढ़े ही निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं. यही एक कारण है कि ट्विटर पर यूज़र्स को रीट्वीट करने से पहले पढ़ने के लिए कहा जाता है.


कोट-ट्वीट्स को देखने पर ये साफ पता चलता है कि यूज़र्स ने सिर्फ ट्वीट पर ध्यान दिया, न कि ट्वीट के आर्टिकल पर.


मेटा के सोशल मॉनिटरिंग प्लेटफ़ॉर्म क्राउड टैंगल पर हमने फिर से यही पैटर्न देखा. यहां द वायर का ट्वीट था जो सब्जेक्ट का फ़ोकस बना. जिन पाठकों के पास क्राउड टैंगल का एक्सेस है, वे इस लिंक पर क्लिक करके इंप्रेशन का एक्सटेंट देख सकते हैं.


बाद में ‘द वायर’ के ट्वीट से अलग ये दावा स्वतंत्र रूप से लोकप्रिय कार्टून, मीम्स और इन्फ़ोग्राफ़िक्स के रूप में शेयर किया जाने लगा जिसमें ऐसी जानकारी दी गई थी जो पीएम की कही गई बातों और ‘द वायर साइंस’ की स्टोरी से बिल्कुल अलग थी. नीचे हमने ऐसे दो उदाहरण रखे हैं. एक सतीश आचार्य का कार्टून है और दूसरा इन्फ़ोग्राफ़िक है.


‘द वायर साइंस’ में आर्टिकल की हेडलाइन भी भ्रामक थी, हालांकि इसमें अप्रत्यक्ष रूप से दावा किया गया था, पीएम ने कहा कि भजनों का इस्तेमाल कुपोषण की समस्या के बोझ को कम करने के लिए किया जा सकता है.

भाषण में डिटेल की कमी और ग़लत अनुवाद

प्रधानमंत्री के भाषण में ये डिटेल में नहीं बताया गया कि ‘मेरा बच्चा अभियान’ कार्यक्रम किस तरह काम करता है. भाषण में इन भजन-कीर्तन सेशन की प्रकृति और ‘पोषण गुरुओं’ की भूमिका के बारे में नहीं बताया गया. दतिया ज़िला के कार्यक्रम अधिकारी से बात करने के बाद ही, ऑल्ट न्यूज़ को ये पता चला कि दर्शकों को जमा करने के लिए भजन-कीर्तन सेशन को एक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

इसके अलावा, ऑल इंडिया रेडियो की वेबसाइट पर मौजूद पीएम के भाषण के अनुवाद में उनकी बातों के सार को अच्छे से नहीं बताया गया है. किसी भी हिंदी न जानने वाले व्यक्ति को अनुवाद पढ़ने के बाद ये पता लगाने में मुश्किल होगी कि क्या बताया जा रहा है.

कुल मिलाकर, ‘मन की बात’ के एक हिस्से में पीएम मोदी ने कुपोषण से निपटने के लिए अपनाए जाने वाले अनोखे तरीकों के बारे में बात की थी. इसे लेकर अलग-अलग सोशल मीडिया यूज़र्स और प्रमुख हस्तियों ने गलत दावा किया. इस भाषण की ग़लत व्याख्या ‘द वायर’ के एक ट्वीट के कैप्शन और ‘द वायर साइंस’ के आर्टिकल के हेडलाइन में भी किया गया है, दोनों ही प्रधानमंत्री के भाषण की बारीकियों को नहीं बता पाए. द वायर हिंदी ने भी ये आर्टिकल पब्लिश किया था जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया. लेकिन आप इसका आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं.

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