फ़ैक्ट-चेक: क्या शांतिपूर्वक चर्च बनाने के लिए ईसाइयों ने हिंदू देवता गणेश की पूजा की?


सोशल मीडिया पर कैथलिक नन की पोशाक पहने एक महिला की तस्वीर वायरल है. तस्वीर में महिला को हिंदू देवता गणेश जी की पूजा करते हुए देखा जा सकता है. ऐसा लगता है कि तस्वीर किसी धार्मिक सभा में ली गई है, जिसमें बाईं ओर स्कूल की वर्दी में कुछ बच्चे और दाईं ओर कुछ लोग औपचारिक रूप से खड़े दिख रहे हैं. तस्वीर के ऊपर तमिल में लिखा एक टेक्स्ट देखा जा सकता है इसमें लिखा है, “चर्च के निर्माण में कोई बाधा न हो, इसलिए ये गणपति की पूजा कर रहे हैं.”

[तमिल में लिखा ओरिजनल टेक्स्ट: “சர்ச் கட்ட தடங்கல் வராமல் ‘ இருக்க கணபதி பூஜயாம்..”]

ट्विटर पर इस तस्वीर को कई बार शेयर किया गया है.

ये तस्वीर इसी दावे के साथ फ़ेसबुक पर भी काफी वायरल है.


इस दावे की सच्चाई जानने के लिए ऑल्ट न्यूज़ के व्हाट्सऐप नंबर (76000 11160) पर कई रिक्वेस्ट मिलीं.


फ़ैक्ट-चेक

गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से हमें पता चला कि ये तस्वीर ओमलंका नामक वेबसाइट की रिपोर्ट से ली गई है. वेबसाइट और वेबपेज का एक्सेस मौजूद नहीं है.

हालांकि, वेबसाइट का आर्काइव वेबैक मशीन पर मौजूद है. वेबैक मशीन के ज़रिये हम ये देख सकते हैं कि पहले अलग-अलग समय में वेबसाइटें कैसी दिखती थीं. हमने इसके माध्यम से ओमलंका का एक आर्टिकल देखा. इस आर्टिकल के पब्लिश होने की तारीख 20 जनवरी, 2016 है. इसमें बताया गया है कि इस कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा के क्षेत्रीय निदेशक सहदुल नजीम और श्रील सिरी निर्मलेश्वर कुरुकल ने की. हमें और कई तस्वीरों के साथ वायरल तस्वीर भी मिली, ये सभी तस्वीरें एक ही कार्यक्रम के दौरान ली गई थी.


आर्टिकल में लिखा है कि थाई पोंगल त्योहार के उत्सव के दौरान श्रीलंका के सममंथुरई ज़िले का ये एक रिवाज था. इस पार्टिकुलर रीजन में, बौद्ध, ईसाई और मुस्लिम धर्म के नेता इस त्योहार को मनाने के लिए एक साथ आते हैं.


एक कीवर्ड सर्च करने पर हमें द मारसु के 2015 के एक आर्टिकल में सममंथुरई, सहदुल नजीम में शिक्षा निदेशक की तस्वीरें मिलीं. ये आर्टिकल तमिल में लिखा गया है. आर्टिकल के पहले पैराग्राफ़ में कहा गया है कि “अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर सम्मंथुराई क्षेत्रीय शिक्षा कार्यालय द्वारा आयोजित ज़िला स्तरीय बाल दिवस कार्यक्रम आज सावलकादई वीरत्तीदल अल-हिदया महा विद्यालय में आयोजित किया गया.”

नीचे हमने द मारसु के 2015 का आर्टिकल और ओमलंका के 2016 के आर्टिकल में मौजूद तस्वीरों का एक कोलाज रखा है. दोनों कार्यक्रमों की अध्यक्षता सममंथुरई के क्षेत्रीय शिक्षा मंत्री सहदुल नजीम ने की. इन्हें देखने से ये स्पष्ट हो जाता है कि वायरल तस्वीर श्रीलंका के सममंथुरई की है.

ऑल्ट न्यूज़ ने ईमेल के ज़रिये श्रीलंकाई पत्रकार दिलरुक्षी हंडुनेट्टी से संपर्क किया. हमने उनसे पूछा कि क्या श्रीलंका के कुछ हिस्सों में इस तरह के आयोजन की संभावना है. उन्होंने हमें बताया कि थाई पोंगल श्रीलंका में तमिल हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाता है. उन्होंने आगे कहा, “ये संभव है कि समारोह में पुजारियों सहित दूसरे धर्म के लोग शामिल हों. हालांकि, श्रीलंका में नए अंतरधार्मिक आंदोलन भी हुए हैं जिनमें बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा दिया जाता है. क्षेत्र के लोगों को भी समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है.”

कुल मिलाकर, ये कहा जा सकता है कि वायरल तस्वीर शांतिपूर्वक चर्च बनाने के लिए हिंदू देवता गणेश की पूजा कर रहे ईसाईयों की नहीं है. ये श्रीलंका के सममंथुरई में एक अंतरधार्मिक उत्सव की तस्वीर है जहां अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए उत्सव में भाग लेने का रिवाज है.

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