हिंदूइज़्म को फिर से प्राप्त करने में मददगार साबित होगा डिस्मैन्टलिंग ग्लोबल सम्मेलन


कुंभ मेले में तीसरे शाही स्नान का दृश्य | पीटीआई


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10 से 12 सितंबर के बीच आयोजित डिस्मैन्टलिंग ग्लोबल हिंदुत्व या डीजीएच, शिक्षाविदों के एक छोटे समूह द्वारा हिंदुत्व विचारधारा के कारण पनपे खतरों का पता लगाने के लिए एक साधारण सी बैठक करने की योजना बनाने के रूप में शुरू हुआ था. लेकिन जल्द ही इसने इतने सारे शिक्षाविदों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया कि यह 50 से अधिक विश्वविद्यालयों से संबंधित 70 से अधिक सह-प्रायोजकों की भागीदारी के साथ एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बदल गया. यह अपने आप में एक अभूतपूर्व बात थी.

इस सम्मेलन को मिल रही इस सफलता ने इसे अमेरिका में हिंदुत्व समूहों की नाराजगी का भी कारण बना दिया, जिन्होंने अपनी पहुंच और धन शक्ति का उपयोग करते हुए इस आयोजन को विफल करने के लिए काफ़ी हद तक प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंन्टस और प्रोवोस्टों को दस लाख से भी अधिक पत्र मिले तथा भारत सरकार द्वारा इस मामले में हस्तक्षेप की भी मांग की गई. इसके साथ ही सह-प्रायोजकों और वक्ताओं को लगातार ट्रोल किया गया और उन्हें डराने -धमकाने से लेकर जान से मारने तक की धमकी भी दी गयी.

दि गार्जियन की खबर के अनुसार, ‘मीना कंडासामी नाम की एक वक्ता के बच्चों की तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट की गई थीं, जिसके नीचे ‘आपके बेटे को एक दर्दनाक मौत का सामना करना पड़ेगा’ जैसे कैपशन के और साथ ही जातिवादी गलियां भी दी गयी थी. आयोजकों को एक ईमेल के माध्यम से भेजी गई इसी प्रकार की एक धमकी कुछ इस तरह की थी.

अमेरिकी शिक्षाविदों को लक्ष्य कर के दी जा रही धमकियों का परिमाण/संख्या और क्रूरता भी अभूतपूर्व थी.

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