सिरिंज संबंधी लापरवाही पड़ सकती है भारी, जा सकती है जान


Reuse of Syringe: पिछले दिनों मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक ही सिरिंज से 30 बच्चों को वैक्सीन देने की घटना सामने आई. इस बात ने सबको चौंका दिया क्योंकि एक आम इंसान को भी इस बात का ज्ञान होता है कि एक बार उपयोग में ली गई सुई या सिरिंज (Syringe) को दोबारा उपयोग नहीं किया जाता है. ऐसे में किसी स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा एक ही सिरिंज से इतने बच्चों को वैक्सीन (Vaccine) लगाने का मामला हैरान और परेशान करने वाला है. इन बच्चों को कोविड (Covid-19 Vaccination) का टीका लगाया जा रहा था.

सिरिंज का दोबारा उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

आपको यह तो पता होगा कि सिरिंज या सुई का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए ऐसा करना खतरनाक हो सकता है. लेकिन ऐसा करने से किस तरह की समस्याएं होती हैं, इस बारे में कम ही लोग जानते हैं. आपको बता दें कि जब किसी सुई या सिरिंज से किसी व्यक्ति को वैक्सीन दी जाती है, तब यह सिरिंज उस व्यक्ति के ब्लड, शरीर के अन्य फ्लूइड इत्यादि के संपर्क में आती है. ऐसे में यदि उस व्यक्ति को कोई रोग होता है तो उस इंफेक्शन के वायरस, बैक्टीरिया या फंगस सिरिंज पर भी आ जाते हैं, जो आंखों से तो नहीं दिखाई पड़ते लेकिन जब इसी सिरिंज से किसी दूसरे व्यक्ति को वैक्सीन दी जाए तो वह व्यक्ति भी संक्रमण का शिकार हो सकता है.

सिरिंज के दोबारा उपयोग से कौन-सी बीमारियां फैलती हैं?

एक ही सिरिंज को एक से अधिक व्यक्ति पर उपयोग करने से एचआईवी एड्स (HIV AIDS), हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B)और हेपेटाइटिस-सी (Hepatitis C) जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं. अमेरिका की स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (CDC) का कहना है कि एक ही सिरिंज का दो बार या इससे अधिक बार उपयोग करने पर  रक्त जनित संक्रामक रोग बहुत तेजी से फैलते हैं.

संक्रमित सिरिंज से कितने लोग होते हैं बीमार?

विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO)की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 11 लाख के करीब हेपेटाइटिस बी के रोगी सामने आ रहे हैं, जिनमें से करीब ढाई लाख लोग अपनी जान गवां देते हैं. वहीं, हेपेटाइटिस-सी के करीब 4 लाख केस हर साल सामने आते हैं और इनमें 90 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हेपेटाइटिस बी के 33 प्रतिशत, हेपेटाइटिस सी के करीब 42 प्रतिशत और एड्स के करीब 3 प्रतिशत केसेज की वजह असुरक्षित इंजेक्शन और सिरिंज का उपयोग होता है. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 में अनसेफ इंजेक्शन की वजह से 1.7 मिलियन लोग हेपेटाइटिस बी और करीब 3.1 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी और करीब 34 हजार लोग  लोग एचआईवी वायरस से संक्रमित हुए.

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, एबीपी न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. 

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