वैक्सीन के बाद प्रतिकूल असर की 61% घटनाओं का संबंध Covid टीकों से, पर कोई जानलेवा नहीं: सरकारी स्टडी


8 सितंबर 2021 को बीकानेर में एक दिन में 1 लाख खुराक का टारगेट बनाने वाले एक विशेष टीकाकरण शिविर में स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 टीके लगाते हुए | फाइल फोटो.


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नई दिल्ली: कोविड-19 टीकों से जुड़ी एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्युनाइज़ेशन (एईएफआई) पर सरकार की ताज़ा रिपोर्ट में पता चला है कि विश्लेषण की गई 61 प्रतिशत घटनाएं कारणपूर्वक टीकाकरण से जुड़ीं थीं. लेकिन, रिपोर्ट में कहा गया है कि उनमें से कोई भी घातक नहीं थी, यानी मौत नहीं हुई थी.

रिपोर्ट का निष्कर्ष था: ‘78 में से 48 मामले जिनके लिए कारणता मूल्यांकन किया गया है, उनका टीकाकरण से निरंतर कारणात्मक जुड़ाव पाया गया. इन 48 में से 28 मामले वैक्सीन-उत्पाद से जुड़ी प्रतिक्रिया के थे और 20 टीकाकरण चिंता से जुड़ीं प्रतिक्रियाएं थीं. 22 मामलों में टीकाकरण से अस्थिर कारणात्मक जुड़ाव पाया गया (आकस्मिक-टीकाकरण से संबंध नहीं) जिसमें 7 मौतें थीं. 7 मामले अनिश्चित श्रेणी में थे, जिनमें 2 मौतों के मामले भी थे. 1 मौत का मामला ऐसा था, जो अवर्गीकृत श्रेणी में था.

वैक्सीन-उत्पाद से संबंधित प्रतिक्रियाएं, जैसे कि नाम से ज़ाहिर है, वो होती हैं जिन्हें कारणात्मक रूप से वैक्सीन से जोड़ा जा सकता है. इन्हें आमतौर से दर्ज किया जाता है, और इनमें बुख़ार, बदन दर्द, एलर्जिक रिएक्शंस और एनाफिलेक्सिस आदि होते हैं. लेकिन, एईएफआई का मूल्यांकन करने वाली कमेटी, आमतौर पर बुख़ार और बदन दर्द जैसे मामूली रिएक्शंस को नहीं, बल्कि गंभीर प्रतिकूल प्रभावों को देखती हैं.

अनिश्चित प्रतिक्रियाएं वो हैं जो टीकाकरण के फौरन बाद होती हैं, लेकिन जिन्हें उपलब्ध वैज्ञानिक सुबूतों के आधार पर, कारणात्मक रूप से टीके से नहीं जोड़ा जा सकता. उस संबंध को स्थापित करने के लिए और स्टडी की ज़रूरत होती है. अवर्गीकृत घटनाएं वो होती हैं जिन पर किसी निर्णायक फैसले पर नहीं पहुंचा जा सका, चूंकि आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं थी.

आकस्मिक घटनाएं वो होती हैं, जिनकी ख़बर टीकाकरण के बाद मिलती है, लेकिन जिनके लिए टीकाकरण के अलावा किसी और कारण का पता, जांच के बाद लगाया जा सकता है.

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