वी. गौरी मद्रास हाईकोर्ट की जज बनीं, सुप्रीम कोर्ट का नियुक्ति के ख़िलाफ़ याचिका सुनने से इनकार


सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ में वकील लक्ष्मण चंद्र विक्टोरिया गौरी को शपथ लेने से रोकने संबंधी याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि नियुक्ति को लेकर पात्रता पर चुनौती दी जा सकती है, लेकिन अदालतों को उपयुक्तता में नहीं पड़ना चाहिए. गौरी से जुड़े सोशल मीडिया एकाउंट और यूट्यूब पर उपलब्ध भाषणों के अनुसार, वे भाजपा के महिला मोर्चा की महासचिव हैं.

लक्ष्मण चंद्र विक्टोरिया गौरी और सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: ट्विटर/पीटीआई)

दिल्ली/चेन्नई: वकील लक्ष्मण चंद्र विक्टोरिया गौरी ने मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय की अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की. इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने गौरी को मद्रास उच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने से रोकने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, जब सुप्रीम कोर्ट में मामले में सुनवाई चल रही थी, उसी समय शपथ समारोह शुरू हुआ.

जस्टिस संजय खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की विशेष पीठ ने कहा, ‘हम रिट याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं. कारण बताए जाएंगे.’

सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस खन्ना ने कहा कि पात्रता और उपयुक्तता के बीच अंतर होता है. उन्होंने कहा, ‘पात्रता पर चुनौती दी जा सकती है. लेकिन उपयुक्तता… अदालतों को उपयुक्तता में नहीं पड़ना चाहिए, अन्यथा पूरी प्रक्रिया नियंत्रण से बाहर हो जाएगी.’

वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन, जिन्होंने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था क्योंकि केंद्र ने गौरी की नियुक्ति को अधिसूचित किया था, ने तर्क प्रस्तुत किया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को बाधित किया गया क्योंकि प्रासंगिक जानकारी कॉलेजियम को नहीं भेजी गई थी.

जजों ने कहा कि उन्होंने रिकॉर्ड में रखी गई हर बात को पढ़ लिया है. राजनीतिक पृष्ठभूमि के संबंध में जस्टिस गवई ने कहा कि उनकी भी राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है, लेकिन यह कभी उनके कर्तव्यों के आड़े नहीं आया.

रामचंद्रन ने तब तर्क दिया, ‘राजनीतिक पृष्ठभूमि का सवाल बिल्कुल नहीं है. यह नफरती भाषण (हेट स्पीच) का मसला है. हेट स्पीच जो पूरी तरह से संविधान के विपरीत है. यह उन्हें (गौरी) शपथ लेने के अयोग्य बनाता है. यह केवल एक कागजी शपथ होगी.’

पीठ ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हम यह कहने की स्थिति में हैं कि यह योग्यता का सवाल है. यह उपयुक्तता का सवाल अधिक है. दूसरा, हम कॉलेजियम को निर्देश नहीं दे सकते.’ साथ ही पीठ ने कहा कि यह मान लेना ‘उचित नहीं होगा’ कि कॉलेजियम ने इन चीजों पर ध्यान नहीं दिया होगा.

गौरतलब है कि इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय के कुछ बार सदस्यों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर गौरी को उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के लिए की गई सिफारिश को वापस लेने की मांग की थी. पत्र में आरोप लगाया गया था कि गौरी ने ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ घृणास्पद भाषण दिए थे.

गौरतलब है कि गौरी की प्रस्तावित पदोन्नति उनकी भाजपा से कथित संबद्धता की खबरों के बाद विवादों में घिर गई थी.

मद्रास उच्च न्यायालय के कई वकीलों की आपत्तियों के बाद तमिलनाडु के मदुरै के 54 वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम को मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में गौरी की नियुक्ति की सिफारिश के समर्थन में लिखा था.

वकीलों के एक समूह ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल लक्ष्मण चंद्र विक्टोरिया गौरी की प्रस्तावित पदोन्नति के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम दोनों को भी अभ्यावेदन भेजा था.

इसमें उन्होंने कहा था कि गौरी की पदोन्नति ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित’ करती है और इस आरोप के समर्थन में उनके द्वारा साक्षात्कारों में की गईं कई टिप्पणियों का उल्लेख किया है.

वकीलों ने कहा कि ‘अल्पसंख्यकों के प्रति इतनी तीव्र शत्रुता रखने वाले व्यक्ति के नाम को जज के तौर पर आगे बढ़ाना परेशान करने वाला है.’ उन्होंने तर्क दिया कि एक मुस्लिम या ईसाई समुदाय का याचिकाकर्ता अगर उनकी (गौरी की) अदालत में पेश होता है तो उसे शायद ही न्याय मिले.

पत्र में कहा गया, ‘एक न्यायाधीश संवैधानिक अधिकारों का संरक्षक होता है और इसका विध्वंसक नहीं हो सकता. इसलिए हम यह कहने के लिए मजबूर हैं कि एक ऐसे व्यक्ति को हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त करना जो एक पूरे समुदाय के प्रति कटुता और शत्रुता रखता है, न्यायपालिका को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा.’

वरिष्ठ वकील एनजीआर प्रसाद, आर. वैगाई, अन्ना मैथ्यू, डी. नागसैला और सुधा रामलिंगम समेत 22 वकीलों के हस्ताक्षर वाले ज्ञापन में कहा गया कि गौरी ने खुद ही स्वीकार किया है कि वह भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की महासचिव हैं.

ख़बरों में भी बताया गया है कि कथित तौर पर गौरी से संबंध रखने वाले सोशल मीडिया एकाउंट और यूट्यूब पर उपलब्ध भाषणों के अनुसार, गौरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला इकाई की महासचिव हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या गौरी अभी भी राजनीतिक दल से जुड़ी हैं.

आर्टिकल 14 की एक रिपोर्ट में गौरी द्वारा दिए गए कई अल्पसंख्यक विरोधी बयानों का भी विवरण दिया गया है.

बता दें कि गौरी मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के समक्ष केंद्र का भी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (6 फरवरी) को गौरी की मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सात फरवरी को सुनवाई करने का फैसला किया था. शीर्ष अदालत के फैसले के ठीक पहले केंद्र ने न्यायाधीश के रूप में गौरी की नियुक्ति को अधिसूचित किया था.

याचिकाकर्ता वकीलों-अन्ना मैथ्यू, सुधा रामलिंगम और डी नागसैला ने अपनी याचिका में गौरी द्वारा मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ की गई कथित घृणास्पद टिप्पणियों का उल्लेख किया था. याचिका में कहा गया था, ‘याचिकाकर्ता न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए ‘गंभीर खतरे’ को देखते हुए चौथे प्रतिवादी (गौरी) को उच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने से रोकने के वास्ते उचित अंतरिम आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं.’

नियुक्ति के बाद गौरी ने कहा- संविधान निर्माताओं के सपनों को साकार करने की दिशा में काम करूंगी 

उधर चेन्नई में वकील लक्ष्मण चंद्र विक्टोरिया गौरी ने मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट की अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण के बाद कहा कि वह लोगों को न्याय देकर संविधान निर्माताओं के सपनों को साकार करेंगी.

शीर्ष अदालत में मंगलवार सुबह सुनवाई के बीच ही गौरी ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की थी. हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी. राजा ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति आदेश पढ़ने सहित अन्य परंपराओं के निर्वहन के बाद उन्हें शपथ दिलाई.

गौरी ने अपने संबोधन में उनमें भरोसा दिखाने और न्यायाधीश पद के लिए उनके नाम की सिफारिश करने के वास्ते मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंदराई, पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम. दुरईस्वामी (सेवानिवृत्त) और मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी. राजा का आभार जताया.

उन्होंने भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ सहित उच्चतम न्यायालय के कई जजों का भी शुक्रिया अदा किया. गौरी ने कहा कि वह तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के एक बहुत दूरस्थ गांव (पश्चिम नेयूर) से ताल्लुक रखती हैं और एक ‘बेहद साधारण परिवार’ से निकली पहली पीढ़ी की वकील हैं. उन्होंने मणिराज और जैकब फ्लेचर सहित अपने सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं के प्रति भी आभार जताया.

गौरी मदुरै विधि कॉलेज की पूर्व छात्रा हैं. स्वामी विवेकानंद के एक उद्धरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह इस बात से वाकिफ हैं कि उन्हें ‘न्यायाधीश होने की महान जिम्मेदारी’ सौंपी गई है, ताकि वह ‘गरीब से गरीब व्यक्ति की अनसुनी और दबी कुचली आवाज’ के लिए काम कर सकें, हाशिए पर पड़े लोगों के जीवन में बदलाव ला सकें, सामाजिक असमानताओं को दूर कर सकें और विविधतापूर्ण देश में बंधुत्व के भाव को मजबूती प्रदान कर सकें.

गौरी ने कहा, ‘मैं पूरी विनम्रता के साथ हमारे संविधान निर्माताओं के सपनों को साकार करने के लिए लोगों को न्याय देने का वचन देती हूं. धन्यवाद. जय हिंद.’

गौरी के साथ चार अन्य लोगों ने भी मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की. इनमें पिल्लईपक्कम बहुकुटुंबी बालाजी (अधिवक्ता), कंदासामी कुलंदाइवेलु रामकृष्णन (अधिवक्ता), रामचंद्रन कलैमथी (महिला न्यायिक अधिकारी) और के गोविंदराजन थिलाकावती (महिला न्यायिक अधिकारी) शामिल हैं. अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल दो साल का होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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