विश्व भारती के कुलपति का शिक्षकों से सख्ती से बात करते कथित वीडियो सामने आया, विवाद खड़ा हुआ



कुलपति और फैकल्टी सदस्यों के बीच शुक्रवार (17 सितंबर) को हुई वर्चुअल बैठक के वीडियो में चक्रवर्ती के जैसी एक आवाज सुनी जा सकती है, जिसमें वह शिक्षकों को हाल में हुईं चोरियों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने और इसका जिम्मा सुरक्षाकर्मियों पर थोपने की कोशिश करने को लेकर बोल रहे हैं.

सुरक्षाकर्मियों ने बीरभूम जिले के एक ‘बाहुबली’ के गुर्गों के डर से कोई प्राथमिकी दर्ज कराने से इनकार कर दिया है.

चक्रवर्ती को वीडियो क्लिप में यह कहते सुना जा सकता है, ‘उसकी (बाहुबली) वजह से विश्व भारती सुरक्षा बढ़ाने का कोई पुख्ता कदम नहीं उठा सकती.’

समाचार एजेंसी पीटीआई की ओर से कहा गया है कि वह इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं कर सका है. विश्व भारती प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है.

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिले के अध्यक्ष अनुव्रत मंडल ने कहा, ‘अगर चक्रवर्ती में साहस है तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि ‘बाहुबली’ से उनका मतलब क्या है.’

मालूम हो कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालय हाल ही में तीन छात्रों को अव्यवस्थित आचरण के लिए बर्खास्त किए जाने के बाद चर्चा में आया था, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुए थे और कुलपति के निवास के बाहर धरना दिया गया था.

विश्व भारती विश्वविद्यालय ने बीते 23 अगस्त को कथित तौर पर गलत आचरण के लिए तीन छात्रों को संस्थान से निष्कासित कर दिया था. हालांकि, 8 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीनों छात्रों को कक्षाओं में दोबारा शामिल होने की अनुमति दे दी थी.

विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में विद्युत चक्रवर्ती के अक्टूबर 2018 से पदभार संभालने के बाद से यहां शिक्षक और छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि उनके पदभार संभालने के बाद से बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय से सदस्यों को निलंबित किया गया है.

फैकल्टी सदस्य असामान्य रूप से बड़ी संख्या में किए जा रहे इन निलंबनों पर सवाल उठा रहे हैं.

नवंबर 2019 से 22 स्टाफकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है, जिनमें 11 फैकल्टी के सदस्य और 11 गैर शिक्षण कर्मचारी हैं. वहीं, 150 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं.

बता दें कि इससे पहले भी विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती विवादों में रहे हैं. उन्होंने पिछले साल गणतंत्र दिवस पर उनके संबोधन की वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले छात्र को हॉस्टल से निकाल दिया था.

वह इस वीडियो में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर कथित रूप से भारतीय संविधान, संसद की सर्वोच्चता पर टिप्पणी कर रहे थे.

वार्षिक पौष मेला (शीतकालीन मेला) को बंद करने से लेकर नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को विश्वविद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जाधारियों में से एक घोषित करने तक, बिद्युत चक्रवर्ती के कुलपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय ने कई विवादों को देखा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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