वानखेड़े हों या पंजाब या बंगाल, दलित अधिकार आयोग पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप क्यों लग रहा है?


राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन विजय सांपला | ट्विटर | @vijaysamplabjp


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नई दिल्ली: अभी इस बात की जांच पूरी नहीं हो पाई है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी समीर वानखेड़े ने अपने अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र को फर्जी तरीके से बनवाया है या नहीं. लेकिन विवादों के घेरे में आए अधिकारी को पहले ही कुछ हाई-प्रोफाइल समर्थन और ‘क्लीन चिट’ मिल गई है.

उन्हें यह क्लीनचिट राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के उपाध्यक्ष अरुण हलदर की तरफ से मिली है, जिन्होंने 31 अक्टूबर को वानखेड़े के आवास का दौरा किया था.

हलदर ने दिप्रिंट से कहा, ‘एक क्रांतिकारी को बदनाम किया जा रहा है. वह ड्रग्स नाम के खतरे के खिलाफ जंग लड़ रहा है. मैंने व्यक्तिगत तौर पर अनुरोध के बाद उसके घर का दौरा किया और सभी दस्तावेज देखे. उनके पिता ने 20 साल पुराने कुछ रिकॉर्ड भी दिखाए.’

हलदर ने जोड़ा, ‘परिवार एक अनुसूचित जाति समुदाय से आता है, केवल उनकी मां मुस्लिम थीं. इतना उच्च पदस्थ अधिकारी इतने लंबे समय तक सभी लोगों को धोखा कैसे दे सकता है?’

उन्होंने कहा, ‘मैं अपने निजी अनुभवों के आधार पर कह रहा हूं कि नवाब मलिक अपने दामाद की तरफ से बदला ले रहे हैं. इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ऐसे पदों पर ज्वाइनिंग से पहले सभी दस्तावेजों की पुष्टि करता है. यह नकली कैसे हो सकता है? एक बार जांच पूरी हो जाने भी यह सब स्पष्ट हो जाएगा.’

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