मेडिटेशन के वक्त स्थिर नहीं बैठ पाते?: ऐसे में ध्यान भटकना काफी सामान्य, एक्सपर्ट्स की सुझाई ये 6 टिप्स करेंगी आपकी मदद


न्यूयॉर्कएक घंटा पहलेलेखक: दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत

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लेखक: ए सी शिल्टन

मेडिटेशन करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। इसमें आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लेनी पड़ती है, जो हमारी फोन के नशे में धुत दुनिया के लिए काफी मुश्किल है। आज लोग 10 से 20 मिनट भी स्थिर नहीं बैठ पाते। इससे गुस्सा और निराशा की भावनाएं बढ़ती हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसा महसूस करना सामान्य है। डिसट्रैक्ट होना फेलियर का सबूत नहीं होता।

डिसट्रैक्ट होने पर भी मेडिटेशन करें

ड्यूक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर जॉन मिचेल कहते हैं कि डिसट्रैक्शन और फ्रस्टेशन के बावजूद भी मेडिटेशन करना चाहिए। इसके फायदे नकारात्मक भावनाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। मेडिटेशन के छोटे-छोटे सेशंस भी आपकी एंग्जाइटी और डिप्रेशन के लक्षणों को कम कर सकते हैं। साथ ही आपके ध्यान को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

मेडिटेशन की शुरुआत करना बेहद मुश्किल हो सकता है, इसलिए हमने कुछ मेडिटेशन एक्सपर्ट्स से बात की, जो आपकी इस अभ्यास में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं उनकी दी हुईं टिप्स…

1. फेलियर को अपनी सफलता समझें
मेडिटेशन की शुरुआत में ही आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप बार-बार डिसट्रैक्ट होंगे। मेडिटेशन टीचर जेफ वॉरेन कहते हैं कि इस दौरान दिमाग में नकारात्मक ख्याल आना स्वाभाविक है। गुड या बैड मेडिटेशन जैसे कोई चीज नहीं होती।

अगर 10 सेकंड के लिए भी आपका ध्यान भटकता है तो खुद को इसके लिए माफ कर दें। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा की प्रोफेसर डॉ. लिडिया जिलोव्स्का के मुताबिक इस दौरान आपको अपने आप से कहना चाहिए- मैं खुश रहूं, स्वस्थ रहूं, पीड़ा न भोगूं आदि।

2. माइंडफुल होने के लिए मेडिटेशन की जरूरत नहीं
माइंडफुलनेस और मेडिटेशन एक दूसरे से रिलेटेड हैं, लेकिन समान नहीं हैं। एक समय पर एक चीज के लिए अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने को माइंडफुलनेस कहते हैं। इसके लिए हमेशा मेडिटेशन किया जाए, यह जरूरी नहीं है। उदाहरण देते हुए जिलोव्स्का ने बताया कि ब्रश करते वक्त दो मिनट खुद पर फोकस करना भी माइंडफुलनेस कहलाता है।

3. माइक्रो-मेडिटेशन करें
प्रोफेसर मिचेल कहते हैं कि आजकल मेडिटेशन के ऐप्स पर 10, 20 और 30 मिनट के सेशंस होते हैं, लेकिन यह बिगनर्स के लिए कठिन हो सकते हैं। आप अगर केवल 3 से 5 मिनट से भी शुरू करते हैं, तो भी मेडिटेशन आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। यह एक स्किल है, जो समय के साथ बेहतर होती है।

4. कहीं भी, कभी भी करें मेडिटेशन
मेडिटेशन के बेनेफिट्स लेने के लिए आपको हमेशा एक जगह बैठने की जरूरत नहीं है। आप नेचर में, घर से बाहर निकलकर भी ये अभ्यास कर सकते हैं। प्रकृति में पैदल चलना और जानवरों को नोटिस करना भी मेडिटेशन ही है। साथ ही योगा और ताई चाई, जिसमें पूरे शरीर का मूवमेंट होता है, वह भी एक तरह का मेडिटेशन ही है।

5. बोरिंग मेडिटेशन में जिज्ञासा लाएं
मेडिटेशन करते समय बोर हो जाना आम बात है। जिज्ञासा जगाने के लिए चिड़ियों की आवाज सुनें, हवा से बालों को हिलता हुआ महसूस करें या सांस लेने पर गौर करें। हम बोर होते ही अपने फोन को चेक करने के आदी हैं, लेकिन दूसरी गतिविधियों से जिज्ञासा लाएंगे तो मेडिटेशन लंबे समय कर सकेंगे।

6. एक्सपर्ट की मदद लें
काफी लोग मेडिटेशन और माइंडफुलनेस का अभ्यास करते समय स्ट्रगल करते हैं। इसके लिए आप एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। वे आपको कॉगनिटिव बिहेवियरल थैरेपी की सलाह देंगे। साथ ही आपको किसी मेडिटेशन ग्रुप से जुड़कर भी मदद मिल सकती है।

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