मुट्ठी बंद करके क्‍यों रखता है नवजात शिशु, जान लेंगे तो नहीं करेंगे चिंता


जब आप अपने नवजात शिशु की आंखों में देखते हैं तो वह कितना मासूम नजर आता है। आप धीरे-धीरे उसके साथ समय बिताते हैं तो उसे समझने की कोशिश करते हैं और उसका ध्यान रखते हैं। आप उसके सोने, जागने, दूध पीने की प्रक्रिया को समझ पाते हैं।
उसकी आदतों से वाकिफ होने लगते हैं। पर हर नए माता-पिता को एक चीज बड़ी आश्चर्यजनक लगती है कि बच्चे अपनी मुठ्ठी बांधकर क्यों रखते हैं? अगर आप भी जानना चाहते हैं कि बच्चे हमेशा अपनी मुठ्ठी बंद क्यों रखते हैं? तो आइए इस आर्टिकल में इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं। छोटे शिशु में मुठ्ठी के बंद होने के उनके अपने स्वभाविक कारण हो सकते हैं। इसका किसी भी तरह के मेडिकल से या फिर तकलीफ से संबंध नहीं है।

​पामर ग्रॉस रिफ्लेक्स

नवजात शिशु बहुत ही लोभी प्रवृत्ति के होते हैं। वह अपनी चीजों को खुद तक समेट कर रखना चाहते हैं। इसी आदत को पाल्मर ग्रास रिफ्लेक्स कहा जाता है। अगर आप अपने बच्चे की हथेली में गुदगुदी करें या फिर उन्हें अपनी उंगली दें, तो वे उंगली को चारों तरफ से कसकर पकड़ लेते हैं।

​सेरेबरल पाल्सी

अगर आपका बच्चा लगातार मुट्ठी बांधकर रखता है तो यह सेरेबरल पाल्सी के कारण हो सकता है। लगातार मुट्ठी बांध के रखने से उसके दिमाग में भी अकड़न आ जाती है। यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। जहां पर बच्चे का दिमाग उसके मांसपेशियों को संकेत देने में सक्षम नहीं होता। इस परिस्थिति में उनके मसल्स कमजोर भी हो सकते हैं। इसके लिए विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

​वेस्टिजियल प्रिमिटिव रिफ्लेक्स

कुछ नवजात शिशु अपनी पुरानी बातों को अच्छी तरह से याद रखते हैं कि वह मां के गर्भ में किस तरह से थे। उस आदत को वो पूरी तरह से पकड़ कर रखते हैं। उनका शरीर झुका हुआ होता है, साथ ही वह अपने हाथ और पैरों को सटाकर रखना चाहते हैं और अपनी मुठ्ठी को कसकर बांधे रखते हैं। इस आदत को छूटने में हफ्ते से 15 दिन का समय लग सकता है।

​मानव विकास का सिद्धांत

कुछ एक्सपर्ट बच्चों की इस आदत को मानव के विकास सिद्धांत से जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि इंसान,बंदरों की एक विकसित प्रजाति का ही हिस्सा है। हमने आज भी बंदरों की इस आदत को पकड़ रखा है।

जहां वह हर चीज को कसकर पकड़ने को हमेशा तैयार रहते हैं। बंदरों के बच्चे अपनी मां के बालों या अपनी मां को कसकर पकड़े रहते हैं और वो अपनी मूठ्ठी में कुछ चीजों को जकड़कर रखना चाहते हैं। क्योंकि उनकी मां पेड़ों पर झूलती रहती हैं। इसी आदत को आज भी हम इंसानों ने बरकरार रखा हुआ है।

​क्या होगा अगर बच्चे गर्भ में अपनी मुठ्ठी नहीं बांधें ?

अगर बच्चे गर्भ के अंदर अपनी मुठ्ठी बांधकर नहीं रखेंगे, तो वे चुटकी बजाने या हाथ पैर को हिलाने की कोशिश करेंगे। जिससे बच्चों की उंगलियां और उनके नाखून से मां की त्वचा पर चोट लग सकती है। गर्भ के अंदर एमनियोटिक सेक होता है जो एक बहुत ही पतली झिल्ली है।

अगर इसके ऊपर बच्चों के नाखून लग जाए तो इसमें से बायोकेमिकल का रिसाव शुरू हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो हार्मोन परिवर्तन की वजह से प्रीमेच्योर डिलीवरी और अन्य तरह के खतरे भी पैदा हो सकते हैं। इसलिए यह एक प्राकृतिक लक्षण है, जिससे बच्चे और मां दोनों की सुरक्षा होती है।

​नवजात शिशु कब खोलते हैं अपनी मुट्ठियां

मां को अपने बच्चे के बारे में यह जानना बेहद अच्छा लगता है कि वह कब अपनी मुठ्ठी खोलेंगे और कब चीजों को पकड़ना शुरू करेंगे। कई नवजात शिशु पालमर रिफ्लेक्स की वजह से 3 से 4 माह के बाद ही अपनी मूठ्ठी खोलना शुरू करता है।

उसके बाद वह धीरे-धीरे चीजों को पकड़ने भी लगते हैं। छोटे खिलौनों से खेलने भी लगते हैं क्योंकि इस उम्र के बाद उनका तंत्रिका तंत्र मजबूत होने लगता है। 6 से 7 महीने की अवस्था के बाद बच्चे पूरी तरह से हाथ खोलकर चीजों को पकड़ने की कोशिश करते हैं।

बच्चों में मुठ्ठी बांधकर रखने की प्रवृत्ति बहुत ही सामान्य है। लेकिन कुछ बच्चे 6 से 7 महीने के बाद भी लगातार मुठ्ठियां बांध कर रखते हैं। अगर वे चीजों को पकड़ना और अपने हाथों से खेलना शुरू नहीं करते तो यह थोड़ी समस्या हो सकती है। इसके लिए आपको विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।



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