भास्कर एक्स्प्लेनर: भारतीय विशेषज्ञों का दावा- बच्चा 12 साल से कम उम्र का है तो वैक्सीन लगाने की इमरजेंसी नहीं; जानें क्यों


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नई दिल्ली6 दिन पहलेलेखक: पवन कुमार

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देश में 12 साल से कम उम्र के बच्चों को कोरोना की वैक्सीन देनी चाहिए या नहीं, इस पर अभी नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन (NTAGI) में चर्चा जारी है। इस बीच देश के बड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस उम्र के बच्चों को वैक्सीन की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि अभी कोई आपात स्थिति नहीं है। लिहाजा आपात स्थिति में इस्तेमाल की इजाजत देने का कोई मतलब नहीं है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैक्सीन को पूरी तरह इजाजत मिलने और लंबे समय का सेफ्टी डेटा उपलब्ध होने के बाद ही बच्चों को टीका लगाने पर विचार करना चाहिए। जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं है।

NTAGI ने 12-15 साल के लिए भी सिफारिश नहीं की

डॉ. गगनदीप कंग ने बताया कि NTAGI ने 12 से 15 साल के बच्चों को भी वैक्सीन देने की कोई सिफारिश नहीं की थी।

डॉ. गगनदीप कंग ने बताया कि NTAGI ने 12 से 15 साल के बच्चों को भी वैक्सीन देने की कोई सिफारिश नहीं की थी।

प्रसिद्ध माइक्रोबायोलॉजिस्ट और वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कंग ने बताया कि NTAGI ने 12 से 15 साल के बच्चों को भी वैक्सीन देने की कोई सिफारिश नहीं की थी। इसका निर्णय नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 (NEGVAC) ने लिया था।

तर्क 1: बच्चों को संक्रमण से दिक्कत नहीं, तो अभी टीके की जल्दबाजी क्यों?

जब पता है कि बच्चों को दिक्कत नहीं होती तो वैक्सीन देकर उससे जुड़े साइड इफेक्ट्स का खतरा मोल लेने की क्या जरूरत है? अगर कुछ बच्चों को ही वैक्सीन के बाद परेशानी बढ़ती है, तब भी इस उम्र के बच्चों को वैक्सीन देने की जरूरत नहीं।- प्रो. संजय राय, दिल्ली AIIMS के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर, बॉयोटेक वैक्सीन के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर

तर्क 2: अभी तो यह अध्ययन करवाएं कि कौन-सी वैक्सीन ज्यादा प्रभावी है

जब तक फुल लाइसेंस न मिल जाए, इस उम्र के बच्चों को वैक्सीन देने का निर्णय उचित नहीं होगा। अभी ऐसे तुलनात्मक अध्ययन होने चाहिए कि बच्चों के लिए कौन सी वैक्सीन ज्यादा प्रभावी और सुरक्षित होगी। अध्ययन में और समय लगे तो लगाना चाहिए, अभी कोई जल्दबाजी नहीं है।- डॉ. गगनदीप कंग, माइक्रोबायोलॉजिस्ट व वायरोलॉजिस्ट

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भारत बायोटेक ने 2 से 18 साल तक के बच्चों पर कोवैक्सीन की बूस्टर डोज संबंधी दूसरे/तीसरे फेज के ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर से अनुमति मांगी है।

भारत बायोटेक ने 2 से 18 साल तक के बच्चों पर कोवैक्सीन की बूस्टर डोज संबंधी दूसरे/तीसरे फेज के ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर से अनुमति मांगी है।

तर्क 3: छोटे बच्चों को कई बीमारियां होती हैं, सबका तो टीका नहीं लगाते

जो बच्चे कैंसर, HIV, कमजोर इम्युनिटी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं, उन्हें वैक्सीन दी जा सकती है। बच्चों को कई तरह की बीमारियां होती हैं लेकिन सभी से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं देते। इसलिए यह भी सोचना होगा कि किस बीमारी से खतरा है, उसी की वैक्सीन दें। – डॉ. रमन गंगाखेड़कर, पूर्व वैज्ञानिक, ICMR

बायोटेक ने 2-18 के बच्चों पर बूस्टर के टेस्ट की मंजूरी मांगी

भारत बायोटेक ने 2 से 18 साल तक के बच्चों पर कोवैक्सीन की बूस्टर डोज संबंधी दूसरे/तीसरे फेज के ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर से अनुमति मांगी है। फिलहाल कोवैक्सीन और कोविशील्ड की एहतियाती डोज 18 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के वैसे लोगों को दी जाती है, जिन्हें दूसरी डोज लिए हुए 9 महीने पूरे हो चुके हैं।

हैदराबाद की कंपनी ने 29 अप्रैल को DCGI के सामने आवेदन करके कोवैक्सीन की बूस्टर डोज के ट्रायल की अनुमति मांगी। यह स्टडी दिल्ली और पटना AIIMS सहित छह स्थानों पर किया जाएगा।

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