भारत ने टूटे चावल के निर्यात पर क्यों किया बैन, क्या अन्य किस्मों पर भी लग सकता है प्रतिबंध


नई दिल्ली: 8 सितंबर को दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देश भारत ने खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की. इस कदम का अनुमान पहले से लगाया जा रहा था क्योंकि कम बारिश के कारण कम और देरी से बुवाई से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है.

इस साल तेज गर्मी गेहूं की उपज में कमी का कारण बनी, जिस वजह से मोदी सरकार ने मई में गेहूं की शिपमेंट पर भी प्रतिबंध लगा दिया था.

लगभग 50 मिलियन टन के वैश्विक चावल व्यापार में भारत का हिस्सा 40 फीसदी है. चावल की कुछ किस्मों पर निर्यात प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं? दिप्रिंट ने इसकी बारीकी से पड़ताल की.


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निर्यात प्रतिबंधों की अब तक की घोषणा

भारत ने 9 सितंबर से बासमती और अधपके (पैराबॉल्ड) चावल को छोड़कर चावल की सभी किस्मों के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है. इसके अलावा सरकार ने टूटे चावल के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जो मिलिंग प्रोसेस का एक बाइप्रोडक्ट है.

2021-22 में भारत के कुल 21.2 मिलियन टन चावल निर्यात में बासमती (4 मिलियन टन) और पैराबोल्ड चावल (7.4 मिलियन टन) की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत थी. शेष, भारत से लगभग 10 मिलियन टन चावल का निर्यात, जिसमें टूटे और कच्चे चावल शामिल हैं, अब प्रतिबंधित है. यह चावल में वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा है.

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