भारतीय फुटबॉल की बहाली का रास्ता खुला: सुप्रीम कोर्ट ने भंग की COA; एक्टिंग जनरल सेक्रेट्री को सौंपा AIFF का जिम्मा


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नई दिल्ली14 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय फुटबॉल महासंघ के मामलों पर सुनवाई करते हुए प्रशासकों की समिति (COA) को भंग कर दिया है। उसने कहा है कि COA आगामी आदेश तक AIFF के मामलों में हस्ताक्षेप नहीं करेगी। इतना ही नहीं, शीर्ष न्यायालय ने भारत सरकार की मांग पर महासंघ के संचालन का जिम्मा AIFF एडमिनिस्ट्रेशन को सौंपा है, जिसकी अगुआई एक्टिंग सेकेट्री जनरल कर रहे हैं।

कोर्ट ने भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) की दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है, जिसमें कार्यों के संचालन के लिए 3 सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि, भारतीय संघ पर लगा फीफा का सस्पेंशन रद्द हो और भारत में अंडर -17 महिला फीफा विश्व कप आयोजित हो सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की टीमों को खेलने की अनुमित मिले।

भारतीय फुटबॉल के बहाली की राह खुली
कोर्ट के इस फैसले से भारतीय फुटबॉल महासंघ के बहाली की राह खुल गई है। क्योंकि, थोड़ी देर पहले FIFA ने कहा था कि AIFF की प्रशासकों की एक समिति (CoA) गठित करने के आदेश के निरस्त होने और एडमिनिस्ट्रेशन के महासंघ के पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के बाद निलंबन हटा लिया जाएगा।

सस्पेंशन का असर
जब तक भारतीय संघ सस्पेंड रहेगा तब तक भारतीय टीमें अंतरराष्ट्रीय मैच में हिस्सा नहीं ले पाएंगी। साथ ही कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय लीग में हिस्सा नहीं ले पाएगा।

क्यों सस्पेंड हुआ महासंघ?
कोर्ट ने AIFF संचालन के लिए प्रशासकों की समिति COA के गठन का फैसला दिया था और समिति कोर्ट के निर्देश पर अपने मुताबिक चुनाव करने लगी। इसमें कुछ पूर्व प्रमुख खिलाड़ियों से वोट कराने का फैसला लिया गया। इसे FIFA ने बाहरी हस्ताक्षेप माना था। FIFA के नियम के अनुसार, राष्ट्रीय संघ को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए।

यह है मामला
यह पूरा विवाद प्रफुल्ल पटेल के भारतीय फुटबॉल संघ के अध्यक्ष पद के हटने के साथ शुरु हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने मई में प्रफुल्ल को हटाने के साथ महासंघ के संचालन का जिम्मा प्रशासकों की समिति COA को सौंपा और चुनाव कराने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने पटेल को क्यों हटाया था?
पटेल की अध्यक्षता वाले महासंघ के चुनाव दिसंबर 2020 में होने थे। लेकिन महासंघ ने अपने संविधान के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए चुनाव नहीं कराए। पटेल ने बतौर अध्यक्ष अपने 3 कार्यकाल और 12 साल पूरे किए। यह नियमों के तहत एक महासंघ के अध्यक्ष के लिए अधिकतम है। इसी वजह से कोर्ट ने उन्हें हटाने का निर्देश दिया था।

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