बिना सूचना के दिल्ली से गिरफ़्तारी पर यूपी पुलिस को कोर्ट की फटकार, कहा- वहां चलता होगा, यहां नहीं


यूपी पुलिस पर आरोप है कि उसने एक लड़की के परिवार की इच्छा के विरुद्ध शादी करने के मामले में लड़के के भाई और पिता को दिल्ली से दिल्ली पुलिस को सूचित किए बिना गिरफ़्तार किया है और पिछले डेढ़ महीने से उनका कोई पता नहीं चल रहा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे लेकर यूपी पुलिस को फटकारते हुए कहा कि अगर ज्ञात हुआ कि दिल्ली पुलिस को बताए बिना ऐसा किया गया है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: लड़की के परिवार की इच्छा के विरुद्ध शादी करने वाली एक व्यक्ति के भाई और पिता की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और कहा ‘यूपी में चलता होगा, यहां नहीं’.

शादी करने वाले लड़का-लड़की दोनों बालिग हैं. यूपी पुलिस ने दिल्ली पुलिस को बताए बिना गिरफ्तारी की थी.

लाइव लॉ के मुताबिक, इसे लेकर जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने कहा, ‘दिल्ली में इन सब की इजाजत नहीं दी जाएगी. आप यहां गैर-कानूनी कार्य नहीं कर सकते हैं.’

नव-विवाहित जोड़े ने याचिका दायर कर सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने लड़की के परिजनों की इच्छा के विरुद्ध एक जुलाई 2021 को शादी की थी.

उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और लड़के के भाई तथा पिता को यूपी पुलिस करीब डेढ़ महीने पहले गिरफ्तार करके ले गई थी और उनका कोई पता नहीं चल रहा है.

मामले में तथ्यों की पड़ताल करने के बाद कोर्ट ने यूपी के एसएचओ शामली को निर्देश दिया है कि वे पूरी केस फाइल के साथ न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों.

कोर्ट ने कहा, ‘जब आप जांच करते हैं तो क्या आप शिकायतकर्ता से पूछताछ नहीं करते? सीसीटीवी फुटेज पेश किया जाए और यदि इस बात की पुष्टि हुई कि शामली पुलिस दिल्ली में गिरफ्तार करने आई थी तो आपके खिलाफ विभागीय जांच बिठाई जाएगी.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जाके कोर्ट को बताइए, बेल के लिए अर्जी कराइये, मुझे फुटेज चाहिए. अगर गाड़ी नंबर मिला और पता चला कि दिल्ली में एंट्री हुई है यूपी पुलिस की, तो कार्रवाई होगी. आप यहां ऐसे गैरकानूनी कार्य नहीं कर सकते हैं.’

इससे पहले जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने दंपति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यह एक अति सामान्य कानून है कि दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले व्यक्तियों को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उसे सूचित किए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.

अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तथ्यों का पता लगाये बिना और यह पता किए बिना कि पक्षकार बालिग हैं या नाबालिग, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां की गईं.

अदालत ने बीते 26 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा था, ‘कोई यह समझ नहीं पाया कि याचिकाकर्ता नंबर एक बालिग है और उसने अपनी मर्जी से अपने माता-पिता का घर छोड़ा है और उसने याचिकाकर्ता नंबर 2 से शादी की है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 366 और धारा 368 के तहत अपराध कैसे बनता है.’

अदालत ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह पता किए बिना कि याचिकाकर्ता नंबर एक बालिग है या नाबालिग और उससे सही तथ्य पता किए बिना प्राथमिकी में गिरफ्तारी की गई है.’

अदालत ने कहा, ‘पुलिस थाना शामली, उत्तर प्रदेश के प्रभारी को नोटिस जारी किया जाए कि वह 28 अक्टूबर, 2021 को व्यक्तिगत रूप से पेश हों और साथ ही थाना शामली, उत्तर प्रदेश में आईपीसी की धारा 366/368 के तहत दर्ज प्राथमिकी संख्या 398/2021 की केस फाइल साथ लायें. यह नोटिस पुलिस थाना ज्योति नगर के एसएचओ द्वारा एसएचओ शामली थाना, उत्तर प्रदेश को लिखित रूप में दिया जाए, जो सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में भी मौजूद रहेंगे.’

पीठ ने कहा, ‘यह एक सामान्य कानून है कि याचिकाकर्ता नंबर 2 के पिता और भाई को दिल्ली पुलिस को बताए बिना उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और ले नहीं जाया जा सकता.’

दंपति ने अदालत को बताया कि उन्होंने परिवार की इच्छा के विपरीत बिना किसी दबाव में जुलाई में अपनी मर्जी से शादी की और अब उन्हें धमकियां मिल रही हैं.

दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि लड़की की मां की शिकायत के संबंध में लड़के के परिवार के सदस्यों को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गत 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था. उसने कहा कि शामली, उत्तर प्रदेश से पुलिस के दिल्ली आने की कोई सूचना नहीं दी गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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