फेक न्यूज एक्सपोज: कंप्यूटर के आविष्कार से 1400 साल पहले भारत में बन चुकी इसकी कलाकृति? जानिए इस वायरल PHOTO का सच


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2 घंटे पहले

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क्या हो रहा है वायरल: सोशल मीडिया पर प्राचीनकाल के कलाकृति की एक तस्वीर वायरल हो रही है। कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर पर काम करते हुए एक शख्स की ये कलाकृति पथर पर बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि प्राचीन भारत की 1400 साल पुरानी ये कलाकृति लालगिरी मंदिर की है।

रोशन राज पुरोहित नाम के यूजर ने फोटो शेयर कर लिखा- 1400 साल पहले पल्लव राजा नरसिंह द्वारा निर्मित लालगिरी मंदिर में एक कंप्यूटर तथा की-बोर्ड के साथ बिजली का तार और ये सब पत्थर की दीवार पर बनाई गई है। यह कैसे हो सकता है। तब बिजली भी नहीं थी, ये आधुनिक तकनीकी यंत्र भी नहीं थे, उन्होंने इसकी कल्पना किस तरह की होगी।

और सच क्या है?

  • वायरल फोटो का सच जानने के लिए हमने इसे गूगल पर रिवर्स सर्च किया। सर्च रिजल्ट में हमें ये फोटो goodreads.com की वेबसाइट पर मिली।
  • वेबसाइट के मुताबिक, कलाकृति की यह तस्वीर 31 जुलाई 2003 को पब्लिश हुई किताब कोसमोस लैटिनोज की कवर फोटो है। इस कवर फोटो को राउल क्रूज नाम के इलस्ट्रेशन आर्टिस्ट ने बनाया है।
  • पड़ताल के दौरान हमें इस फोटो से जुड़ी अधिक जानकारी strangehorizons.com नाम की वेबसाइट पर मिली।
  • वेबसाइट के मुताबिक, इस तस्वीर को फ्यूचर एंसेसटर यानी भावी पूर्वज नाम दिया गया है और इसे राउल क्रूज ने बनाया है। राउल क्रूज़ 1983 से फ्रीलांस इलस्ट्रेटर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने कई किताब, मैगजीन, कौमिक्स के लिए तस्वीरें डिजाइन की हैं।
  • साफ है कि सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत है। ये तस्वीर 1400 साल पुरानी कलाकृति की नहीं बल्कि 31 जुलाई 2003 को पब्लिश हुई किताब कोसमोस लैटिनोज की कवर फोटो है।

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