पैरेंटिंग पर आते-जाते हर कोई कर देता है कमेंट, तो इन 5 स्‍ट्रैटजी से दूर करें अपनी टेंशन


वैसे तो एक पुरानी कहावत है जियो और जीने दो लेकिन आज की दुनिया में इस कहावत का कोई मतलब नहीं रह गया है। आए दिन हर कोई किसी ना किसी की आलोचना कर रहा होता है। ऐसा नहीं है कि आलोचना करने वाला सिर्फ बाहर का ही होता है बल्कि कई बार घर के अंदर भी बार-बार आपको आपके गलत होने का एहसास दिला देते हैं। ऐसी सलाह दी जाती हैं जो शायद जरूरी नहीं हैं। खासकर नए पैरेंट्स को अक्सर इन सभी बातों का सामना करना पड़ता है।

नए पैरेंट्स को कुछ ऐसी बातें या सलाह सुनने को मिलती हैं जो समझ नहीं आती कि यह सच्ची सलाह हैं या उन्हें गलत पैरेंटिंग करने के लिए जज किया जा रहा है। जैसे आपने भी सुना होगा कि कई बार पैरेंट्स से रिश्‍तेदार या जान-पहचान के लोग पूछ लेते हैं कि ‘क्या आपका बच्चा अभी तक डायपर पहनता है?’ ‘क्या आप अभी तक बच्चों को बोतल से दूध देते हैं?’ ‘आपका बच्चा इतना पतला क्यों है?’ इस तरह की बातें पैरेंट्स को चिंता में डाल देती हैं। कई बार पैरेंट्स को लगने लगता है कि गलती शायद उनकी ही है, शायद वे ही अपने बच्चे को गलत तरीके से पाल रहे हैं। ऐसे में मन में कई सवाल आना और साथ में गुस्सा भी आना लाजिमी है। इसलिए आपके लिए यह समझना जरूरी है कि सही सलाह और आलोचना में क्या अंतर है, ताकि आप सही तरीके से इस मामले को सुलझा सकें।

​अंतर करना सीखें

आपको लोगों द्वारा दी गई सच्ची सलाह और नीचा दिखाने के लिए किए गए जजमेंटल में अंतर करना सीखना होगा। कई बार बाहर के लोग हमें अच्छी सलाह दे जाते हैं और घर में गलत पैरेंटिंग के लिए नीचा दिखाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप इन दोनों में अंतर समझें और इन सब से निपटने का सही रास्ता चुनें।

​विचार करें

आपको विचार करना होगा कि क्या आपने ही लोगों से सलाह मांगी थी। क्या आप ही चाहते हैं कि लोग आपको एडवाइज दें। यदि ऐसा नहीं है और आपको लोगों की सलाह नहीं चाहिए तो आप प्यार से बिना किसी को तकलीफ पहुंचाए लोगों तक इस बात को पहुंचा सकते हैं, कि आपको सलाह की जरूरत नहीं है।

​प्रतिक्रिया देने से पहले सोचें

बार-बार आलोचना का शिकार होने की वजह से हो सकता है कि आप गलत प्रतिक्रिया देने लगे हैं। जब भी आपको कोई सलाह दे, किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से पहले सोचेa कि क्या यह सलाह सच में मेरे काम की है या सिर्फ नीचा दिखाने का एक तरीका है। ऐसा समझने के बाद ही आप किसी तरह की प्रतिक्रिया दें।

फोटो साभार : TOI

​सेंसिटिविटी पर आलोचना

बच्चों को पालना वैसे भी बहुत मुश्किल भरा काम है। ऐसे में यदि बच्चों की परवरिश को लेकर बार-बार आलोचना का सामना करना पड़े तो शायद निराशा और बढ़ जाती है। यदि यह विषय आपके लिए बेहद संवेदनशील है तो आपको आलोचक को बताना होगा कि आप इसके बारे में बुरा महसूस करते हैं ताकि सामने वाला आपकी संवेदनाओ को समझे और इस विषय पर आप से बात ना करे।

फोटो साभार : TOI

​इग्नोर करें

मनुष्‍य का स्वभाव ही होता है एक-दूसरे को सलाह देना और कई बार दूसरों को नीचा दिखाना, ये उन्हें सशक्त महसूस भी कराता है। ऐसे में सबसे अच्छा तरीका होता है लोगों की बातें सुनना और भूल जाना। आप वही करें जो आपको अपने बच्चे के लिए सही लगता है। आलोचना से बचने का सबसे अच्छा तरीका होता है इग्नोर करना।

अपने मम्‍मी-डैडी से सीखें कम पैसों में भी बच्‍चों की अच्‍छी परवरिश करना, उनकी ये खूबियां आएंगी आपके काम



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.