पब्लिक जगहों पर बैन, पर निजी इस्तेमाल के लिए नियम अलग: ‘ड्राई स्टेट’ गुजरात में कभी शराब की कमी नहीं रही


अहमदाबाद: बड़ौदा में ‘अवैध’ शराब की एक जहरीली खेप ने 125 लोगों की जान ले ली थी. अहमदाबाद में मरने वालों की संख्या 150 से ज्यादा थी. बोटाद जिले और अहमदाबाद की धंधुका नगरपालिका में अपनी जान से हाथ धोने वालों में 42 ग्रामीण थे. पहली घटना 1989 में, दूसरी 2009 में और तीसरी घटना पिछले हफ्ते की है.

घटनाएं किस दशक की हैं, अगर इस पर ध्यान न दे तों ये सभी गुजरात की उसी पुरानी कहानी को कहती नजर आती हैं कि शराबबंदी लोगों को शराब पीने से नहीं रोक पाई है. हां, इसके चलते शराब बनाने और उसके व्यापार से जुड़ी एक अवैध इंडस्ट्री को जरूर जन्म दे दिया है, जो कथित तौर पर पुलिस और राजनेताओं की सह पर पनप रही हैं.

यह एक ऐसा राज है जिसे सब जानते हैं: अमीर हो या गरीब, ऊंची जाति से हो या न हो, गुजरात में शराब तक सब की पहुंच है.

मार्च में गुजरात विधानसभा में एक लिखित उत्तर में राज्य सरकार ने बताया कि सिर्फ पिछले दो सालों में अधिकारियों ने 235 करोड़ रुपये की शराब जब्त की है. इसमें भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की एक करोड़ बोतलें, देशी शराब की 19 लाख बोतलें और बीयर की 12 लाख बोतलें शामिल हैं.

पिछले हफ्ते शराब से हुई मौतों के सिलसिले में गुजरात पुलिस ने कम से कम 15 गिरफ्तारियां की और कई जगह छापे मारे. वहीं इस बार पुलिस पर भी चाबुक चला है. बोटाद और अहमदाबाद ग्रामीण के जिला पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) का तबादला कर दिया गया और कम से कम छह पुलिस अधिकारियों को कथित तौर पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया.

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