नहीं पड़ेगी बच्‍चों को डांटने या मारने की जरूरत, इस तरह चुटकियों में मान जाएगा बात


क्या आप अपने बच्चों को खुद नुकसान पहुंचाकर उन्हें डांटकर या पीटकर खुद दुखी होते हैं? क्या आपके ऊपर काम का भार इतना ज्यादा हो जाता है कि आपका गुस्सा आपके बच्चों पर निकल पड़ता है? हम यह मानें या ना मानें, जाने-अनजाने में हम अपनी परेशानियों का दबाव बच्चों पर बनाने लगते हैं।
जब तक आपका बच्चा छोटा है और आपकी निगरानी में है तब तक आप उसे डांट सकते हैं लेकिन जैसे ही आपका बच्चा इंडिपेंडेंट होगा, वह आपकी बात नहीं मानेगा। अगर आपके बच्चे आप से डरते हैं तो यह आपके और आपके बच्चे के रिश्तों के बीच में एक बड़ी दरार पैदा कर सकता है।
बड़े होने के बाद इस दरार को मिटाना नामुमकिन हो सकता है। ज्यादा डांटने या फिर उन्हें मारने से आपका डर उनके ऊपर से खत्म हो सकता है। उसके बाद वह आपकी किसी भी बात को नजरअंदाज करने लगेंगे। वह आपकी बातों को ही नहीं बल्कि उनके दिमाग में आपका महत्व भी धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा।

सकारात्मक माहौल बनाएं

बच्चों को कोई भी काम देते समय उनका काम बहुत ही ज्यादा रोचक और इंटरेस्टिंग बनाएं। उन्हें काम को इस तरह से दें कि उसे करने में उन्हें मजा आए। उस काम में खुद भी भागीदार बनें। बच्चों को काम करने में जितना ज्यादा मजा आएगा। वह उसे पूरा करने में अपनी पूरी क्षमता लगाएंगे। यह उनके सीखने की प्रवृत्ति को भी बढ़ाएगा।

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बच्चों को प्रोत्साहित करें

बच्चों को उनके काम के लिए प्रोत्साहित करें। प्रोत्साहन के लिए आप तारीफ और तोहफे का तरीका चुन सकते हैं। बच्चों के काम करने का माहौल जितना ज्यादा सकारात्मक होगा, वह उसमें ज्यादा दिलचस्पी दिखाएंगे। बच्चों को डांटने की बजाय उनकी तारीफ करें। दो बच्चों के बीच तुलना बिल्कुल भी ना करें। अपने घर का माहौल सकारात्मक बनाएं।

लॉजिक से परिचय करवाएं

बच्चों को किसी भी काम से जुड़ा लॉजिक समझाएं। उनके दिमाग में उठ रहे सवालों को सुलझाएं। उन्हें समझाएं कि यह काम करना उनके लिए क्यों जरूरी है?

इससे उन्हें क्या फायदे मिलने वाले हैं। बच्चों को रटने की बजाय समझने का तरीका समझाएं। उन्हें हर तरीके के लॉजिक से वाकिफ करवाएं। उनके सवालों को ध्यान से सुनें और पूरी तसल्ली से उसका जवाब दें।

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गलतियां ही सीखने का जरिया बनती हैं

बच्चों से काम करते वक्त होने वाली हर तरह की गलतियों को नजरअंदाज करें। आपको यह समझना होगा कि यह उनकी सीखने की अवस्था है और बिना गलतियों के सीखना नामुमकिन है।

अगर आप उन्हें गलतियों पर डांटने लगेंगे तो उनकी सीखने की प्रवृत्ति धीरे-धीरे कम होती जाएगी। गलतियां बार-बार दोहराने पर उन्हें समझाएं कि इन गलतियों को बार-बार दोहराने से ये उनकी आदत में शामिल हो सकता है और उनके जीवन पर असर डाल सकता है।

शब्दों का खास ख्याल रखें

बच्चों को कोई भी चीज सिखाते या समझाते समय अपने द्वारा उपयोग किए गए शब्दों का इस्तेमाल सौम्यता से करें। ध्यान रखें कि यही शब्द वह भी आगे जाकर इस्तेमाल करेंगे और हो सकता है कि यह उनकी जिंदगी पर बहुत गलत असर डाले।

अपने शब्दों को सोच समझकर बच्चों के सामने रखें। आपके द्वारा बोला गया एक-एक शब्द बच्चों का अपना शब्द बनता जाता है। आपके द्वारा किया गया व्यवहार उनकी आदत बन जाता है। इसलिए अपने द्वारा किए गए व्यवहार और चुने गए शब्दों का खास ख्याल रखें।

आईना होते हैं बच्चे

हमें यह बात समझनी होगी कि बच्चे हमारा ही आईना होते हैं। एक माता-पिता के द्वारा किए गए व्यवहार ही बच्चों की आदत बनते हैं। इसलिए अगर आप बच्चों को कुछ समझाना चाहते हैं तो अपनी आवाज में नरमी और व्यवहार में उनके लिए प्यार लाएं। तभी वो आपकी बातों को अच्छी तरह से समझ पाएंगे।



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