जिनपिंग की तानाशाही: पार्टी नेताओं से जुड़े विवादित मुद्दों पर चर्चा करने वालों को सलाखों के पीछे भेज रहे


  • Hindi News
  • International
  • Jinping’s Dictatorship Sending Those Who Discuss Controversial Issues Related To Party Leaders Behind Bars

5 मिनट पहलेलेखक: स्टीवेन ली

  • कॉपी लिंक

चीन प्रशासन ने 10 अफवाहों की एक सूची जारी की है, जिस पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा के लिए मना किया गया है।

चीन में 27 वर्षीय एक महिला को ‘महापुरुष’ के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के मामले में 7 महीने की सजा सुनाई गई है। जु नाम की इस महिला ने कम्युनिस्ट पार्टी के नेता रहे डॉन्ग चुनरुई का मजाक उड़ाया था। चीन की स्कूली किताबों में चुनरुई को युद्धनायक का दर्जा प्राप्त है। उनकी शहादत की वजह से 1949 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को सत्ता मिली थी। दरअसल, इस महिला को चीन के शहीदों और नायकों की बदनामी पर सजा देने वाले नए कानून के उल्लंघन के मामले में सजा हुई है।

मार्च में इस कानून में संशोधन किया गया था। यह कानून राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सख्त अभियान का हिस्सा है। इसका मकसद कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास और उसके नेताओं पर ऐतिहासिक बहसों पर लगाम लगाना है। चीन के साइबरस्पेस प्रशासन ने नागरिकों को कम्युनिस्ट पार्टी के ‘महापुरुषों’ का अपमान या मजाक उड़ाने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत करने के लिए ऑनलाइन हॉटलाइन भी शुरू की है।

साथ ही प्रशासन ने 10 अफवाहों की एक सूची जारी की है, जिस पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा के लिए मना किया गया है। इस लिस्ट में कुछ अफवाहें ऐसी हैं, जैसे- क्या माओत्से तुंग का मार्च वास्तव में इतना लंबा नहीं था? क्या माओ के बेटे, माओ एनिंग, कोरियाई युद्ध के दौरान अमेरिकी हवाई हमले से मारे गए थे, क्योंकि उन्होंने तला हुआ चावल बनाने के लिए एक स्टोव जलाया था? बीजिंग में एक मुखर राजनीतिक विश्लेषक वू कियांग कहते हैं, ‘यह एक पूर्ण राजनीतिक अधिनायकवाद की स्थापना का संकेत है।’

जिन विषयों पर शोध होता था, अब उस पर भी सजा दे रहे
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी लंबे समय से असंतोष को दबा रही हैै। तिब्बत से तियानमेन स्क्वायर विरोधों तक उन विषयों पर चर्चा प्रतिबंधित कर दी है। यह नया कानून और आगे जाता है। कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास और उसकी प्रतिष्ठा धूमिल करने वाले विषयों पर चर्चा को अपराध की श्रेणी में रख दिया गया, जो कभी बहस और शोध का विषय थे, जिसमें माओ का शासन भी शामिल था। मार्च से अब तक इस कानून का इस्तेमाल कर 15 लोगों को दंडित किया गया है, जबकि ये बहुत ही मामूली मुद्दे थे।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *