जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली पर लोगों को गुमराह नहीं करूंगा: ग़ुलाम नबी आज़ाद


वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि 10 दिन में अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि वे अनुच्छेद 370 के बारे में बात नहीं करते, लेकिन वे कहना चाहेंगे कि आज़ाद चुनावी फायदे के लिए लोगों को बेवक़ूफ़ नहीं बनाता.

गुलाम नबी आजाद. (फोटो: पीटीआई)

बारामूला: हाल में कांग्रेस छोड़ने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने रविवार को कहा कि वह 10 दिन के भीतर अपनी नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा करेंगे और इसकी विचारधारा ‘आजाद’ होगी.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नए राजनीतिक दल का एजेंडा जम्मू कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली और लोगों की नौकरी तथा भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा.

आजाद ने 26 अगस्त को कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कश्मीर घाटी में अपनी पहली जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं अपने सहयोगियों को धन्यवाद देता हूं, जो मेरे साथ खड़े हैं और मेरी नई पार्टी का आधार हैं, जिसकी घोषणा अगले 10 दिन के भीतर की जाएगी.’

उत्तरी कश्मीर के बारामूला में डाक बंगले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आजाद ने कहा कि उनकी नई पार्टी अपने नाम की तरह अपनी विचारधारा और सोच में ‘आजाद’ होगी.

उन्होंने कहा, ‘मेरी पार्टी आजाद होगी. मेरे कई सहयोगियों ने कहा कि हमें पार्टी का नाम आजाद रखना चाहिए. लेकिन, मैंने कहा कभी नहीं. लेकिन, इसकी विचारधारा स्वतंत्र होगी, जो किसी अन्य में शामिल या विलय नहीं होगी. ऐसा मेरी मृत्यु के बाद हो सकता है, लेकिन तब तक नहीं.’

आजाद ने कहा कि जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और लोगों की नौकरी और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने पर जोर दिया जाएगा.

आजाद ने अपनी पार्टी बनाने की तैयारियों के बीच रविवार को कहा कि वह अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर लोगों को गुमराह नहीं करेंगे, क्योंकि संसद में केवल दो तिहाई बहुमत वाली सरकार ही प्रावधान की बहाली सुनिश्चित कर सकती है.

आजाद ने पिछले महीने कांग्रेस छोड़ने के बाद कश्मीर घाटी में अपनी पहली रैली में कहा, ‘आजाद जानता है कि क्या किया जा सकता है और क्या नहीं. मैं या कांग्रेस पार्टी या तीन क्षेत्रीय दल आपको अनुच्छेद 370 वापस नहीं दे सकते, न ही (टीएमसी प्रमुख) ममता बनर्जी, या द्रमुक या (राकांपा प्रमुख) शरद पवार.’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे, जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं अनुच्छेद 370 के बारे में बात नहीं करता हूं. मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि आजाद चुनावी फायदे के लिए लोगों को बेवकूफ नहीं बनाता है.’

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, आजाद ने कहा, ‘मैंने संसद में (अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म करने के लिए) विधेयक के खिलाफ खुलकर मतदान किया, लेकिन कुछ लोग वोट की राजनीति के लिए झूठी कहानी गढ़ रहे हैं. यह लोगों को आंदोलन के लिए उकसाने और उन्हें मारने के लिए बनाया गया धोखा है. जब तक मैं जीवित हूं, मैं झूठ के खिलाफ लड़ूंगा. अगर आप मुझे चुप कराना चाहते हैं तो आपको मुझे मारना होगा.’

उन्होंने कहा, ‘मैं अल्लाह के सामने कसम खाता हूं कि मैं आपको गुमराह नहीं करूंगा. मैं ऐसे नारे या मुद्दे नहीं उठाऊंगा, जिन पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है.’

आजाद ने कहा कि संसद में केवल दो-तिहाई बहुमत वाली पार्टी ही पूर्ववर्ती राज्य का विशेष दर्जा बहाल कर सकती है, जिसे केंद्र ने अगस्त 2019 में रद्द कर दिया था.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी की हर राज्य में हार के साथ राज्यसभा में उसकी ताकत कम हो रही है …मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 350 से ज्यादा सीट मिल सकती हैं.’

आजाद ने कहा, ‘मैं यह कहां से हासिल कर सकता हूं? लोगों को गुमराह क्यों करूं.’

उन्होंने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहने के दौरान अपने विकास कार्यों को गिनाते हुए कहा, ‘‘मेरी पार्टी विकासोन्मुखी होगी. इसका एजेंडा लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना होगा.’

आजाद ने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं, चाहे वह राष्ट्रीय हो या क्षेत्रीय. उन्होंने कहा, ‘विभिन्न दलों में कई लोग मेरे दोस्त हैं.’

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का उल्लेख करते हुए आजाद ने जम्मू कश्मीर के लोगों से अपील की कि अगर वे उनका समर्थन करते हैं तो वह उनके लिए अपना खून बहाएंगे. आजाद ने कहा, ‘लेकिन, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि झूठे नारों के शिकार न हों.’

आजाद के राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल खत्म होने पर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए, पूर्व कांग्रेस नेता ने कहा, ‘कोई भी इंसान भावुक हो जाता है.’

आजाद ने कहा, ‘जब मैं जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री था, तो गुजरात के कुछ पर्यटक आतंकवादी हमले में मारे गए थे. मैं भावुक हो गया और जब मैंने उनके शवों के अवशेष देखे तो मैं रो पड़ा, उनके बच्चे मुझे गले लगा कर रो रहे थे. मैं भी एक इंसान हूं.’

आजाद ने कहा, ‘मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उन्होंने मुझे कई बार फोन किया. मेरे पीए ने उनसे कहा कि मैं रो रहा हूं और बात नहीं कर सकता और बाद में उनसे बात करूंगा. वह दिन में कई बार फोन करते रहे. जब शाम को, मैंने शवों को वापस भेजा, बच्चों ने मुझे फिर से गले लगाया. मैं रो रहा था और मोदी से बात की, जिन्होंने यह जानने के लिए फोन किया था कि क्या शव भेजे जा चुके हैं.’

आजाद ने कहा, ‘इसलिए जब मैं राज्यसभा से सेवानिवृत्त हुआ तो मोदी भावुक हो गए. उन्हें वह घटना याद आ गई. लेकिन, उन्होंने (मोदी) यह नहीं कहा कि उनका मेरे बिना खाना हजम नहीं होगा या मेरे बारे में सोचे बिना सो नहीं सकते.’

आजाद ने कहा, ‘कश्मीर के लोगों को मोदी की टिप्पणियों पर गर्व करना चाहिए, उन्होंने कश्मीर के लोगों की मानवता और आतिथ्य के बारे में क्या कहा. लेकिन, कांग्रेस के नेताओं ने मुझसे इसके बारे में कभी नहीं पूछा. क्योंकि उनके पास दिल नहीं है. वे आपका इस्तेमाल करते हैं और फेंक देते हैं. विपक्ष के जिन नेताओं को मैंने भला-बुरा कहा उन्होंने मेरी इंसानियत, मेरी ईमानदारी और मेरे काम का सम्मान किया. तो इसमें गलत क्या है.’

अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी के इस आरोप का जिक्र करते हुए कि आजाद ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के पक्ष में मतदान किया था, उन्होंने कहा कि बुखारी को पहले यह समझना चाहिए कि संसद कैसे काम करती है.

आजाद ने कहा, ‘मैंने गृह मंत्रालय द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए लाए गए विधेयक के खिलाफ मतदान किया था.’

बता दें कि पिछले महीने कांग्रेस से अपना पांच दशक पुराना नाता खत्म करने वाले वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने बीते 27 अगस्त को भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार करते हुए कहा था कि वह जम्मू कश्मीर में जल्द ही अपनी नई पार्टी बनाएंगे.

गौरतलब है कि गुलाम नबी आजाद ने 26 अगस्त को पार्टी को अलविदा कह दिया और दावा किया कि देश का सबसे पुराना दल अब ‘समग्र रूप से नष्ट हो चुका है’ तथा इसका नेतृत्व आतंरिक चुनाव के नाम पर ‘धोखा दे रहा है.’

उन्होंने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर ‘अपरिपक्व और बचकाने व्यवहार’ का भी आरोप लगाया और कहा कि अब सोनिया गांधी नाममात्र की नेता रह गई हैं क्योंकि फैसले राहुल गांधी के ‘सुरक्षागार्ड और निजी सहायक’ करते हैं.

आजाद ने कांग्रेस से अपना रिश्ता उस वक्त तोड़ा है जब पार्टी संगठनात्मक चुनाव की दिशा में आगे बढ़ रही है. कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की तिथि निर्धारित करने के संदर्भ में कांग्रेस कार्य समिति रविवार को बैठक करने वाली है. आजाद फिलहाल कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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