जनसंख्या नियंत्रण: राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को पक्ष बनाने के लिए SC में नई याचिका


सुप्रीम कोर्ट, फाइल फोटो | Manisha Mondal | ThePrint


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नई दिल्ली: देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति सहित कुछ कदम उठाने संबंधी जनहित याचिका में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्ष बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है.

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि जनसंख्या विस्फोट देश के प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक बोझ समेत कई समस्याओं की मूल वजह है.

अश्विनी कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए जनहित याचिका दायर की थी जिसमें देश की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए दो बच्चों के नियम सहित कुछ कदम उठाने का आग्रह करने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था.

केंद्र ने पहले कोर्ट से कहा था कि भारत अपने लोगों पर जबरन परिवार नियोजन लागू करने के स्पष्ट रूप से खिलाफ है और एक निश्चित संख्या में बच्चे पैदा करने के लिए किसी भी तरह के दबाव के परिणाम प्रतिकूल होंगे साथ ही इससे जनसांख्यिकीय विकृति उत्पन्न होगी.

केंद्र ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि देश में परिवार कल्याण कार्यक्रम स्वैच्छिक प्रकृति का है जिसने दंपतियों को उनकी पसंद और बिना किसी मजबूरी के अपने परिवार का आकार तय करने और परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाने में सक्षम बनाया है.

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