गोल्डन गर्ल : अंतर्राष्ट्रीय वुशु स्पर्धा में गीतांजलि ने जीता गोल्ड, घर लौटने पर भव्य स्वागत


सतना. सतना की बुशू खिलाड़ी गीतांजलि त्रिपाठी का आज घर लौटने पर शानदार स्वागत किया गया. गीतांजलि अंतर्राष्ट्रीय वुशु स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर लौटी हैं. उनके स्वागत में परिवार और परिचितों के साथ आम लोग और सांसद गणेश सिंह भी मौजूद थे. ऐसा स्वागत देख गीतांजलि की आंखें भर आयीं. गीतांजलि 12 साल की आयु में माता पिता से दूर रही और आज देश की लाडो बन गयी.

जॉर्जिया में हुए अंतर्राष्ट्रीय वुशु गेम्स में सात अगस्त को तिरंगे के साथ एक युवा खिलाड़ी जब विक्ट्री स्टैंड पर खड़ी हुई तो पूरे सतना जिले का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. गले मेले में गोल्ड मेडल था. वो लाडो सतना जिले के रामपुर करही गांव की गीतांजलि थी. जिसने वुशु स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत कर देश का मान बढ़ाया था. आज गीतांजलि सतना लौटीं तो उनका यहां भव्य स्वागत हुआ. भारत माता के जयकारे लगे. सांसद गणेश सिंह ने गीतांजलि की आगवानी की और सम्मान के साथ साथ हौसलाअफजाही की.

गौरव के पल

गीतांजलि जब महज सातवीं कक्षा में थीं तभी से वुशु की ट्रेनिंग के लिए अपने माता पिता से दूर हो गयी थीं. उसके बाद शुरू हुआ उनका सफर, सफलता के कई मुकाम तक पहुंचा. उन्होंने कई राष्ट्रीय स्पर्धाएं और अब वुशु इंटरनेशनल गेम जीत कर लौटी हैं. गीतांजलि का कहना है मेरे लिए वो क्षण यादगार हैं जब तिरंगा सामने लहरा रहा था. एक तिरंगा मेरे बदन पर था और राष्ट्रगान बज रहा था. अब गीतांजलि एशियन गेम्स की तैयारी में जुट जाएंगी.

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बेटियों के लिए एक पिता की सलाह

गीतांजलि तीन बहन और दो भाई हैं. पिता विनोद त्रिपाठी सीधी में पुलिस विभाग में एएसआई हैं. गीतांजलि ने अब एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल का लक्ष्य निर्धारित किया है. बेटी की सफलता पर माता पिता खुशी से भावुक हैं. उनका कहना है बेटियों की जगह चार दीवारी में नही बल्कि बाहर भी है. बस उन्हें मौका देने और विश्वास करने की जरूरत है. गीतांजलि एसएससी में नौकरी कर रही हैं. खेल कोटे से ही वो देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

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