गर्भ निरोधक गोलियों से कम होती है फर्टिलिटी पॉवर? जानिए कैसे शरीर पर पड़ता है इनका असर


हाल में ही राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस 5) द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 2015-16 के बाद फैमिली प्लानिंग के लिए गर्भ निरोधक के मॉडर्न तरीके अपनाने वालों में 8.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह एक स्वागत योग्य समाचार है, जो इस बात की ओर इंगित करता है कि भारत की जनसंख्या वृद्धि अंततः धीमी हो रही है। इसने बर्थ कंट्रोल और इनफर्टिलिटी के बीच संबंधों के बारे में एक बहस छेड़ दी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इनफर्टिलिटी पुरुष या महिला प्रजनन प्रणाली का एक विकार है, जिसे 12 महीने या उससे ज्यादा समय तक सेक्सुअल इंटरकोर्स करने के बाद कंसीव न कर पाने की अक्षमता के रूप में जाना जाता है।
इनफर्टिलिटी की समस्या से दुनिया भर के लाखों कपल्स जूझ रहे हैं। इनफर्टिलिटी विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है, जैसे -ट्यूबल डिसऑर्डर, (ब्लॉकड फैलोपियन ट्यूब), यूटेरस डिसऑर्डर (एंडोमेट्रियोसिस), जन्मजात विकार (सेप्टेट यूटेरस), ओवरी डिजीज (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम), और हार्मोनल असंतुलन। इसके अलावा यह संभावित रूप से एक जेनेटिक कंडीशन भी हो सकती है। दूसरी ओर, बर्थ कंट्रोल के नियमित इस्तेमाल से प्रजनन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। भारत में परिवार नियोजन के लिए सबसे ज्यादा कंडोम, टैबलेट, वजाइनल रिंग्स, गर्भनिरोधक इंजेक्शन और इंट्रॉटरीन डिवाइस, का इस्तेमाल किया जाता है। कंसीव करने की प्लानिंग करने पर इनका इस्तेमाल बंद कर दिया जाता है।

​कॉन्ट्रासेप्टिव बंद करने पर कंसीव करने के लिए क्या करना चाहिए?

कंसीव करने के लिए कॉन्ट्रासेप्टिव बंद करने के अलावा लाइफस्टाइल में भी कुछ चेंज करना जरूरी होता है। पोषण से भरपूर संतुलित डाइट लें। ज्यादा मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन, पर्याप्त विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम और मिनरलस को अपने भोजन में शामिल करें। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स खाना बंद करें।

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फर्टिलिटी डाइट

प्रीबायोटिक्स, प्रोबायोटिक्स और पॉलीफेनोल्स से भरपूर पदार्थ खाएं। कम से कम 8 घंटे की अच्छी नींद लें। यह शरीर को रीसेट करने के साथ साथ रीफ्रेश करता है। कुछ हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव बॉडी में ब्लड शुगर के लेवल में बदलाव लाने का काम करते हैं।

इसलिए जरूरी है कि जिन महिलाओं ने कंसीव करने के लिए कॉन्ट्रासेप्टिव लेना बंद कर दिया है, उन्हें इंसुलिन रेसिस्टेंस के लिए टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। कंसीव करने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए आंत माइक्रोबायोम को उसके वास्तविक लेवल तक लाना जरूरी होता है, क्योंकि यह बॉडी में एस्ट्रोजन के लेवल को ठीक करता है।

​कंसीव करने से पहले आपको कब तक इंतजार करना चाहिए?

अध्ययनों के अनुसार, कॉन्ट्रासेप्टिव का उपयोग बंद करने वाली 83 प्रतिशत महिलाओं ने पहले वर्ष के अंदर ही कंसीव कर लिया। यह भी ज्ञात हुआ है कि कॉन्ट्रासेप्टिव के इस्तेमाल की अवधि का कंसीव करने में लगने वाले समय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसलिए, यदि आप लंबे समय से कॉन्ट्रासेप्टिव का उपयोग कर रही हैं, तो आपको कंसीव करने को लेकर टेंशन नहीं लेना चाहिए।

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इनफर्टिलिटी के कोई लक्षण हैं

यदि आप कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल बंद करने के एक साल बाद भी कंसीव नहीं कर पाई हैं, तो आप इनफर्टिलिटी से पीड़ित हो सकती हैं।

गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाना

ऐसे मामले में, गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाना बहुत जरूरी होता है। डॉक्टर इनफर्टिलिटी का कारण समझकर समुचित इलाज शुरू कर सकते हैं। इनफर्टिलिटी का इलाज दवा की मदद से ओवुलेशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए, फैलोपियन ट्यूब को ठीक करने के लिए सर्जिकल प्रक्रिया या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) या इंट्रॉयूट्राइन इनसेमिनेशन (आईयूआई) जैसी सहायक गर्भाधान विधियों से किया जा सकता है।

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