क्रेच सुविधा, सप्ताह में 40 घंटे काम- नर्सों के काम करने की स्थितियां कैसे सुधारना चाहती है मोदी सरकार


नई दिल्ली: हर स्वाथ्य देखभाल सुविधा में क्रेच सुविधाएं, सालाना स्वास्थ्य जांच, सप्ताह में काम के 40 घंटे निर्धारित और आपात स्थिति में अतिरिक्त घटों के लिए कॉम्प ऑफ- ये उन मसौदा दिशा-निर्देशों के कुछ प्रावधान हैं, जिन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्लू) ने सभी स्वास्थ्य देखभाल संस्थाओं में नर्सों के काम की स्थितियां सुधारने के लिए तैयार किया है.

मंत्रालय ने अगले एक महीने में इन पर आम लोगों और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं जिसके बाद मसौदा दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा.

लेकिन, स्वास्थ्य चूंकि राज्यों का विषय है इसलिए अधिकारियों का कहना है कि गाइडलाइन्स को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किए जाने के बाद भी, संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में इन नियमों को लागू कराने का जिम्मा राज्यों का होगा.

अपने मसौदे में मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की ग्लोबल स्ट्रैटजी ऑन ‘ह्यूमन रिसोर्सेज फॉर  हेल्थ:वर्कफोर्स 2030’ का हवाला दिया है जिसमें ‘स्वास्थ्य श्रमबल के व्यक्तिगत, रोजगार और पेशे से जुड़े अधिकारों को, जिनमें काम करने का सुरक्षित और अच्छा माहौल, किसी भी तरह के भेदभाव, जबरदस्ती और हिंसा से मुक्ति शामिल है, बनाए रखने की बात की गई है.

मसौदा दिशा-निर्देशों में स्वास्थ देखभाल संस्थाओं के लिए अनिवार्य किया गया है कि नर्सिंग स्टाफ को अस्पताल परिसर या किसी उचित दूरी पर आवास उपलब्ध कराए जाएं.

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