केंद्र ने अदालत से कहा- जनहित में ईडी प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाया गया



नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रमुख का कार्यकाल जनहित में बढ़ाया गया है, क्योंकि अनेक मामले अहम स्तर पर हैं और उनके उचित तथा त्वरित निस्तारण के लिए अधिकारियों को बनाए रखना जरूरी है.

वित्त मंत्रालय ने एक हलफनामे में शीर्ष अदालत को सूचित किया कि नव-नियुक्त किसी अधिकारी को नए संस्थान के कामकाज को समझने तथा उसके प्रति अभ्यस्त होने में समय लग सकता है.

उसने हलफनामे में कहा, ‘ईडी निदेशक के कार्यकाल में दो साल से ज्यादा और अधिकतम पांच साल तक का विस्तार प्रशासनिक दृष्टिकोण से जरूरी था, जहां ऐसे अनेक मामलों में संगठन प्रमुख का निरंतर बने रहना जरूरी है, जो अहम स्तर पर हैं और ऐसे मामलों की निगरानी के लिए ऐतिहासिक समझ तथा पृष्ठभूमि जरूरी है.’

उसने कहा, ‘मामलों के उचित और त्वरित निस्तारण के लिए एजेंसी में अधिकारियों की निरंतरता जरूरी है.’

ईडी के मौजूदा निदेशक संजय कुमार मिश्रा को बार-बार दिए गए कार्यकाल विस्तार को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था.

ईडी प्रमुख संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल के विस्तार को और संशोधित कानून को चुनौती देने वाले नेताओं की जनहित याचिकाओं के जवाब में हलफनामा दाखिल किया गया है. संशोधित कानून पांच साल तक कार्यकाल विस्तार की अनुमति देता है.

मंत्रालय ने कहा कि निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने के लिए संशोधन इसलिए किया गया, क्योंकि इस प्रमुख एजेंसी द्वारा विशेष तरह का कामकाज किया जाना एक सतत प्रक्रिया है और संस्थान की अगुवाई कर रहे व्यक्ति का कार्यकाल दो से पांच साल तक का होना चाहिए.

सरकार ने पहले इस फैसले को चुनौती देने वाली राजनीतिक दलों के नेताओं की जनहित याचिकाओं की मंशा पर सवाल खड़े किए थे और इन्हें ‘दबाव बनाने की चाल’ करार दिया था.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला और तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा समेत अन्य द्वारा दाखिल आठ जनहित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत ने 19 सितंबर की तारीख तय की है.

उसने याचिकाओं से निपटने में उसकी मदद के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता केवी विश्वनाथन को न्याय-मित्र नियुक्त किया है.

अदालत ने बीते 2 अगस्त को सुरजेवाला और जया ठाकुर, टीएमसी सांसद मोइत्रा, साकेत गोखले, कृष्ण चंदर सिंह, विनीत नारायण और मनोहर लाल शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया था.

जनहित याचिकाओं में ज्यादातर केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2021 को चुनौती दी है जो ईडी निदेशक के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने का प्रावधान करता है.

आठ याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से नवंबर 2021 के सरकार के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें मिश्रा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था.

मालूम हो कि 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी संजय कुमार मिश्रा को पहली बार नवंबर 2018 में दो साल के कार्यकाल के लिए ईडी निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था. उनका कार्यकाल नवंबर 2020 में समाप्त होना था. मई 2020 में वह 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति की आयु तक भी पहुंच गए थे.

हालांकि, 13 नवंबर 2020 को सरकार ने एक आदेश में कहा था कि मिश्रा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है. सरकार द्वारा कहा गया था कि उनके 2018 के कार्यकाल के आदेश को भारत के राष्ट्रपति द्वारा, उनका कार्यकाल दो से तीन साल बढ़ाने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से संशोधित किया गया है.

पूर्वव्यापी प्रभाव वाले आदेश को कॉमन कॉज एनजीओ द्वारा शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी. हालांकि, जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने मिश्रा के कार्यकाल को पूर्वव्यापी रूप से बढ़ाने के सरकार के निर्णय को बरकरार रखा और कहा कि अब और विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी.

इसमें यह भी कहा गया कि सरकार को पूर्वव्यापी बदलाव करने का अधिकार सिर्फ ‘दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों’ में है. हालांकि, सरकार ने नवंबर 2021 में मिश्रा का कार्यकाल समाप्त होने से चार दिन पहले उन्हें नवंबर 2022 तक एक और विस्तार दे दिया था.

इसे आसान बनाने के लिए सरकार ने तब केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था, जिससे उसने खुद को ईडी और सीबीआई के निदेशकों का कार्यकाल पांच वर्ष तक बढ़ाने की शक्ति दे दी. अध्यादेश दिसंबर 2021 में कानून बन गया था.

तब से ही इन बदलावों की आलोचना ईडी और सीबीआई की ‘स्वतंत्रता को समाप्त’ करने के एक कदम के रूप में की जा रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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