काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे शुरू, मुस्लिम पक्ष के वकील ने उठाए सवाल


वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेंद्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह तथा अन्य ने अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर काशी विश्वनाथ मंदिर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी. साथ ही परिसर स्थित सभी मंदिरों और देवी-देवताओं के विग्रहों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सर्वे कराने का अनुरोध किया था.

बीते शुक्रवार को एडवोकेट कमिश्नर और मनोनीत सदस्य वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर और शृंगार गौरी के सर्वेक्षण के लिए पहुंचे थे. (फोटो: पीटीआई)

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी मस्जिद स्थित शृंगार गौरी परिसर में अदालत के आदेश पर शुक्रवार को एडवोकेट कमिश्नर की अगुवाई में एक टीम ने ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर के कुछ हिस्सों का वीडियोग्राफी-सर्वे शुरू कर दिया.

वादी पक्ष के वकील के मुताबिक, शनिवार को बैरिकेडिंग (ज्ञानवापी मस्जिद परिसर) के अंदर सर्वे कराया जाएगा. वही मुस्लिम पक्ष के वकील ने एडवोकेट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसके खिलाफ अदालत में प्रार्थना-पत्र देने का ऐलान किया है.

वादी पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने वीडियोग्राफी-सर्वे का शुक्रवार का काम पूरा होने के बाद संवाददाताओं को बताया, ‘एडवोकेट कमिश्नर ने जिलाधिकारी से समन्वय करके यह लिख दिया है कि कल (शनिवार) हम बैरिकेडिंग के अंदर जाएंगे. कल अपराह्न तीन बजे का समय निर्धारित हुआ है, बैरिकेडिंग के अंदर जाने के लिए. कल पूरे परिसर की वीडियोग्राफी होगी और एडवोकेट कमिश्नर हम लोगों की मौजूदगी में बैरिकेडिंग के अंदर जाएंगे.’

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे को लेकर विरोध दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रहा. एडवोकेट कमिश्नर की टीम ज्ञानवापी मस्जिद परिसर पहुंची. वहीं, परिसर के बाहर नमाजियों की भीड़ इकट्‌ठी हो गई. नारेबाजी शुरू होने के बाद पुलिस ने भीड़ को खदेड़ दिया.

उधर, मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने वीडियोग्राफी सर्वे के लिए नियुक्त कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें बदलवाने के लिए शनिवार को अदालत में प्रार्थना-पत्र देने की बात कही है.

उन्होंने सर्वे के दायरे में ली जाने वाली इमारतों को कुरेद-कुरेद कर दिखाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अदालत ने खोदने या कुरेदने का कोई आदेश नहीं दिया था और वह आज हुई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को वीडियोग्राफी-सर्वे टीम ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर नहीं गई.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, एडवोकेट कमिश्नर को बदलने के लिए मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र लगाया था. जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि एडवोकेट कमिश्नर और वादी पक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें.

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र पर ये सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में हुई. उन्होंने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 9 मई नियत की है.

मुस्लिम पक्ष के वकील यादव ने कहा, ‘आयोग की कार्यवाही (शुक्रवार) अपराह्न चार बजे शुरू हुई और मस्जिद के पश्चिम की तरफ जो चबूतरा है, उसकी वीडियोग्राफी कराई गई. उसके बाद कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद का प्रवेश द्वार खुलवा कर अंदर जाने का प्रयास किया, जिस पर मैंने विरोध दर्ज कराया और कहा कि अदालत ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है कि मस्जिद के अंदर जाकर उसकी वीडियोग्राफी की जाए. लेकिन कोर्ट कमिश्नर ने दावा किया कि उन्हें ताला खुलवा कर उसकी वीडियोग्राफी कराने का आदेश मिला है, मगर सच्चाई यह है कि ऐसा कोई आदेश नहीं है, लिहाजा मैं कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सीधे प्रश्न चिह्न खड़ा करता हूं.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रार्थना पत्र तैयार किया है इसमें लिखा है कि कमिश्नर का व्यवहार निष्पक्ष नहीं है. वह एक पक्ष के रूप में कार्यवाही करने आ रहे हैं और उनपर भरोसा नहीं है. कल मैं इसी आशय का प्रार्थना पत्र अदालत में देकर कोर्ट कमिश्नर को बदलवाने का आग्रह करूंगा.’

इससे पहले एक स्थानीय अदालत के आदेश पर काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी मस्जिद स्थित शृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों की वीडियोग्राफी तथा सर्वे के काम के लिए एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र और वादी पक्ष के कई लोग ज्ञानवापी पहुंचे थे. काम शुरू होने से पहले ज्ञानवापी में जुमे की नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा थे.

उन्होंने बताया कि इसी दौरान कुछ शरारती तत्वों ने नारेबाजी शुरू कर दी. हालांकि पुलिस ने नारेबाजी कर रहे लोगों को खदेड़ दिया. इस बीच, काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी के आसपास की दुकानें बंद कर दी गईं.

ज्ञानवापी मस्जिद का रखरखाव करने वाली संस्था ‘अंजुमन इंतजामिया मसाजिद’ के सह-सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने बताया, ‘मुस्लिम पक्ष के लोग ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी का विरोध कर रहे थे, क्योंकि मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी वर्जित है.’

उन्होंने दावा किया कि अदालत ने जिन स्थलों की वीडियोग्राफी-सर्वे का आदेश दिया है, उसमें मस्जिद के अंदर का परिसर शामिल नहीं है.

यासीन ने बताया, ‘विरोध के बाद सर्वे टीम ने शाम चार बजे से शृंगार गौरी, नंदी और ज्ञानवापी कूप समेत कई स्थानों पर अपना काम शुरू किया.’

सूत्रों ने बताया कि विवाद से कुछ समय पहले काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट संख्या चार के सामने बैरिकेडिंग के पास एक महिला कपड़ा बिछाकर नमाज पढ़ने लगी, जिसे पुलिस बाद में थाने ले गई.

पुलिस के अनुसार, महिला की पहचान जैतपुरा निवासी आयशा के रूप में हुई है और वह विक्षिप्त है. पुलिस को तलाशी में उसके पास हिंदू देवी-देवताओं की फोटो मिली है.

गौरतलब है कि विश्व वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेंद्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह तथा अन्य ने अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी.

इसके साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित सभी मंदिरों और देवी-देवताओं के विग्रहों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अदालत से सर्वे कराने का अनुरोध किया था.

सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गत 26 अप्रैल को अजय कुमार मिश्रा को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे करके 10 मई को अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. मिश्रा ने वीडियोग्राफी और सर्वे के लिए छह मई का दिन तय किया था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामला संवेदनशील होने के कारण जिले की सभी थानों की पुलिस के साथ-साथ स्थानीय अभिसूचना इकाई को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए हैं.

मालूम हो कि इसके अलावा अयोध्या में बाबरी मस्जिद के साथ- जिसे 1992 में ध्वस्त कर दिया गया था- हिंदुत्ववादी समूहों ने विभिन्न मस्जिदों को मंदिरों में परिवर्तित करने का आह्वान किया था. वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में ईदगाह, दोनों ही मंदिरों के बगल में हैं और इस सूची (मस्जिदों को मंदिरों में परिवर्तित करने वाली) में सबसे ऊपर हैं.

भारत में धुर दक्षिणपंथी संगठनों की लंबे समय से मस्जिदों को हटाने की मांग रही है और इसे लेकर एक नारा भी चलाया जाता रहा है, जो इस तरह से है, ‘अयोध्या-बाबरी सिर्फ झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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