कार्बन उत्सर्जन कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे इलेक्ट्रिक व्हीकल, फाइनेंस पर जोर देने की जरूरत: नीति आयोग


हाइलाइट्स

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ाने के लिए फाइनेंस की भूमिका महत्वपूर्ण है.
साथ ही छोटे शहरों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की जरूरत है.
नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट के साथ यह रिपोर्ट तैयार की है.

नई दिल्ली. भारत के परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने में ग्रीन मोबिलिटी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) परमेश्वरन अय्यर ने बुधवार को यह बात कही. अय्यर ने ‘शून्य फोरम’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ाने के लिए फाइनेंस की भूमिका महत्वपूर्ण है.

अय्यर ने इलेक्ट्रिक वाहनों के फाइनेंस से जुड़े जोखिमों को कम करने के तरीके खोजने की जरूरत पर भी जोर दिया है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत का तेजी से शहरीकरण हो रहा है और इस तरह छोटे शहरों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की जरूरत है.

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3.7 लाख करोड़ तक हो सकता है इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार
नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट (आरएमआई) इंडिया द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट के अनुसार बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में इलेक्ट्रिक वाहन फाइनेंस बाजार का आकार बढ़ाने की पर्याप्त क्षमता है. यह बाजार 2025 तक 40,000 करोड़ रुपये और 2030 तक बढ़कर 3.7 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि ईवी खरीदने के लिए बैंकों और एनबीएफसी द्वारा दिए जाने वाले कर्ज को रिजर्व बैंक के प्राथमिकता-क्षेत्र लोन (पीएसएल) दिशानिर्देशों में शामिल किया जाना चाहिए.

भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर
स्विस ऑर्गेनाइजेशन IQAir की ओर से जारी एयर क्वालिटी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 50 सबसे ज्यादा प्रदूषित में 35 अकेले भारत के हैं. ऐसे में इलेक्ट्रिक व्हीकल के प्रयोग से प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है. इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले ज्यादा किफायते होंते और शोर भी कम करते हैं.

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2030 तक 50 प्रतिशत होंगे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर
दूसरी ओर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन और मैकिंजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में 2030 तक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. इस केटेगरी के तहत कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत और 70 प्रतिशत होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में यात्री या भारी कमर्शियल वाहनों की तुलना में बिजली से चलने वाली दोपहिया और तिपहिया वाहनों की कुल लागत अधिक आकर्षक होने की संभावना है.

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