कर्नाटक: बजरंग दल ने मंगलुरू के पब में चल रही कॉलेज पार्टी रोकी, पुलिस का हमले से इनकार


सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में हिंदुत्ववादी संगठन के सदस्य पार्टी करने वाले छात्रों को गालियां देते हुए दिख रहे हैं. पार्टी में बाधा डालने के पीछे बजरंग दल का तर्क था कि इससे ‘भारतीय संस्कृति का उल्लंघन’ हो रहा था. उधर, पुलिस का कहना है कि पब पर हमला नहीं हुआ, बजरंग दल कार्यकर्ता केवल यह पूछताछ करने गए थे कि नाबालिगों को शराब तो नहीं परोसी जा रही है.

घटना के वायरल वीडियो का एक स्क्रीनशॉट. (साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 26 जुलाई, मंगलवार की शाम कर्नाटक के मंगलुरू में एक पब में चल रही कॉलेज पार्टी को इस आधार पर बाधित किया कि इसमें ‘भारतीय संस्कृति का उल्लंघन’ हो रहा है.

इस घटना के सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हिंदुत्ववादी संगठन के सदस्यों को पार्टी करने वालों को गालियां देते हुए देखा जा सकता है, जिसके चलते वे जल्दी से परिसर छोड़कर चले गए. घटना मंगलुरू के एक पब ‘रिसायकल: द लाउंज’ में हुई.

हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं को महिलाओं के पार्टी करने से आपत्ति थी और उन्होंने पार्टी करने वालों पर ‘अवैध गतिविधियों’ में शामिल होने का आरोप लगाया.

ऐसा माना जा रहा है कि यह हमला पिछले हफ्ते सामने आए उस वायरल वीडियो की प्रतिक्रिया में हुआ है जिसमें एक निजी अपार्टमेंट में दो युवाओं को एक-दूसरे को चूमते (किस करते) देखा गया था और उनके दोस्त उन्हें बढ़ावा दे रहे थे.

द न्यूज मिनट ने बजरंग दल के जिला प्रमुख शरण पंपवेल के हवाले से लिखा है, ‘पिछले हफ्ते, सेंट एलॉयसियस कॉलेज के छात्रों का ‘लिप लॉक’ चैलेंज करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था. अब, इसी कॉलेज के छात्र पार्टी कर रहे थे. (बजरंग दल) के सदस्यों ने (पुलिस) विभाग को सूचित किया और पार्टी को रोक दिया गया.’

वीडियो को लेकर कॉलेज के छात्रों के एक समूह पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया था. लेकिन, पुलिस ने बताया कि वीडियो छह महीने पुराना था और घटना तब हुई जब छात्र ‘ट्रुथ और डेयर’ खेल रहे थे.

जहां तक गुरुवार की घटना का सवाल है तो मंगलुरू पुलिस ने इस बात को खारिज किया है कि पब पर हमला हुआ था, साथ में यह कहा है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सिर्फ पब के बाउंसर्स से यह पूछताछ करने के लिए संपर्क किया था कि कहीं नाबालिगों को शराब तो नहीं परोसी जा रही है.

मंगलुरू के पुलिस कमिश्नर शशि कुमार ने एनडीटीवी को बताया, ‘सोशल मीडिया पर ऐसा कहा जा रहा था कि पब पर हमला हुआ है. किसी भी पब या रेस्तरां पर हमला नहीं हुआ है.’

स्थानीय पुलिस द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने बताया कि उन्हें 25 जुलाई सोमवार को करीब रात 8 बजे मीडिया से ऐसी सूचना मिली थी कि ‘कुछ अवैध गतिविधियां हो रही हैं.’

कमिश्नर ने कहा कि जब तक पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, पब बंद हो रहा था और करीब 20 लड़के और 10 लड़कियां वहां से जा रहे थे और वहां कोई हमला नहीं हुआ था.

रिपोर्ट के अनुसार, वास्तव में, यह घटना एक अन्य हिंदुत्ववादी संगठन विश्व हिंदू परिषद द्वारा जारी उस बयान के कुछ दिन बाद हुई जिसमें संगठन ने निजी कॉलेज के छात्रों पर ‘ड्रग्स और सैक्स’ रैकेट चलाने का आरोप लगाया था. संगठन ने यह संदेश देते हुए एक पोस्टर भी जारी किया था और इस संदेश को इंटरनेट पर व्यापक रूप से प्रसारित किया था.

‘रिसायकल’ पब, जहां सोमवार की घटना हुई, उसी स्थान पर है जहां एक समय ‘एमनेशिया’ पब हुआ करता था, जो 2009 में तब सुर्खियों में आया था जब श्री राम सेना गुट के हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने वहां पार्टी कर रहे महिला और पुरुषों के साथ हिंसा करते हुए मारपीट की थी.

तब हमला कैमरा में कैद हो गया था, जिसमें कुछ पुरुषों को पब के अंदर महिलाओं को थप्पड़ मारते हुए, उनके बाल पकड़कर उन्हें बाहर खींचते हुए और दिनदहाड़े उन्हें बेरहमी से पीटते हुए देखा जा सकता था. उस घटना से विवाद खड़ा हो गया था और हमलावरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे.

हालांकि, 2009 की घटना के 9 साल बाद 2018 में श्री राम सेना के संस्थापक प्रमोद मुतालिक और 30 अन्य समेत सभी आरोपियों को मंगलुरू की एक अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.





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