एबॉर्शन करवाने के बाद कितने रह जाते हैं प्रेगनेंट होने के चांसेस?


कुछ महिलाओं का कंसीव करने के बाद मिसकैरेज हो जाता है या कुछ महिलाएं एबॉर्शन करवाना चाहती हैं लेकिन इसके साथ ही उनके मन में यह सवाल भी रहता है कि क्‍या एबॉर्शन या मिसकैरेज करवाने के बाद वो दोबारा कंसीव कर पाएंगी या इसका असर उनके प्रेगनेंट होने के चांसेस पर पड़ सकता है?
हैदराबाद के केयर हॉस्‍पीटल के गायनेकोलॉजी विभाग से सीनियर कंसल्‍टेंट डॉक्‍टर रोलिका केशरी ने बताया कि दवा या सर्जरी से प्रेग्‍नेंसी को खत्‍म करने को एबॉर्शन कहा जाता है। गर्भपात कराने से किसी महिला की गर्भ धारण करने या फिर से गर्भवती होने की क्षमता प्रभावित नहीं होती है और न ही यह भविष्य में गर्भावस्था की जटिलताओं के जोखिम को बढ़ाता है।

कुछ मामलों में ही होता है

कुछ मामलों में ही होता है

डॉक्‍टर रोलिका ने आगे बताया कि यह केवल कुछ दुर्लभ या अपवाद मामलों में होता है जिसमें एक महिला को फिर से गर्भवती होने में समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा सर्जिकल गर्भपात के दौरान या बाद में गर्भाशय की परत को नुकसान या क्षति के कारण हो सकता है।

इस स्थिति को एशरमैन सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है जो बहुत दुर्लभ है और सर्जरी से इसका इलाज किया जा सकता है। इसमें डॉक्टर गर्भाशय से क्षतिग्रस्‍त ऊतकों को हटा देते हैं।

हो सकता है इंफेक्‍शन

हो सकता है इंफेक्‍शन

इसके अलावा, डॉक्‍टर कहती हैं कि अगर सर्जरी के बाद महिला के गर्भ में इंफेक्‍शन हो जाता है और उसका तुरंत इलाज नहीं किया जाता है तो भविष्य में गर्भधारण या प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचने का मामूली जोखिम हो सकता है।

यह संक्रमण अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब में फैल सकता है और एक्टोपिक गर्भावस्था या बांझपन का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन ज्यादातर गर्भपात के मामलों में, डॉक्टर एबॉर्शन से पहले एंटीबायोटिक्स देते हैं ताकि इस तरह के संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके।

यदि गर्भपात के बाद पेट में गंभीर दर्द, तेज बुखार, ब्‍लीडिंग, योनि से बदबूदार स्राव आदि जैसे किसी भी लक्षण का अनुभव होता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इंड्यूस्‍ड एबॉर्शन

इंड्यूस्‍ड एबॉर्शन

दिल्‍ली के शालीमार बाग की फोर्टिस अस्‍पताल की गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की डायरेक्‍टर अर्पणा जैन कहती हैं कि एबॉर्शन का मतलब है आरंभिक अवस्‍था में प्रेग्‍नेंसी टर्मिनेशन जो गर्भपात की वजह से स्‍वत: हो सकता है या फिर अनचाही प्रेग्‍नेंसी के मामले में इंड्यूस्‍ड टर्मिनेशन भी कराया जाता है। यहां हम इंड्यूस्‍ड एबॉर्शन यानि अनचाही गर्भ से मुक्ति के लिए स्‍वयं गर्भपात करवाने के प्रभावों पर चर्चा करेंगे।

फोटो साभार : pexels

क्‍या दोबारा प्रेगनेंट हो सकती है

क्‍या दोबारा प्रेगनेंट हो सकती है

डॉक्‍टर अपर्णा कहती हैं कि किसी सामान्‍य मेडिकल या सर्जिकल एबॉर्शन से भविष्‍य में गर्भधारण करने की क्षमता पर असर नहीं पड़ता और न ही इसकी वजह से प्रेग्‍नेंसी संबंधी जटिलताएं बढ़ती हैं, यह बात कई अध्‍ययनों एवं ऐसे मामलों में लंबे समय तक फॉलो-अप करने के आधार पर साबित हो चुकी है लेकिन कुछ मामले अलग हो सकते हैं।

सबसे पहले तो यह है कि बार-बार सर्जिकल एबॉर्शन कराने से गर्भाशय की अंदरूनी परत काफी खुरच सकती है, जिसकी वजह से गर्भाशय को क्षति पहुंच सकती है जो इनफर्टिलिटी का कारण बनती है

जानिए, बार बार गर्भपात का क्या कारण है ?

कॉम्प्लिकेशन आ सकती हैं

कॉम्प्लिकेशन आ सकती हैं

डॉक्‍टर ने बताया कि सर्जिकल एबॉर्शन की जटिलताओं के चलते गर्भाशय या सर्विक्‍स में इंफेक्‍शन या इंजरी भी हो सकती है, जो आगे चलकर गर्भधारण को प्रभावित कर सकती है या फिर प्रीटर्म डिलीवरी और लो बर्थ वेट जैसी जटिलताओं का कारण बन सकती है

बार-बार गर्भपात करवाने की वजह से पेल्विस इंफेक्‍शन हो सकता है जो ट्यूब्‍स तथा ओवेरीज तक फैल सकता है और इस कारण भविष्‍य में फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है या फिर ट्यूब्‍स में प्रेग्‍नेंसी (जिसे एक्‍टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं) ठहरने की संभावना बढ़ जाती है।
फोटो साभार : pexels

नोट : अगर आपकी भी कोई प्रेग्‍नेंसी प्रॉब्‍लम या कॉम्प्लिकेशन है जिस पर आप गायनेकोलॉजिस्‍ट की सलाह या एक्‍सपर्ट एडवाइस लेना चाहती हैं, तो उसे [email protected] पर भेज सकती हैं। आपकी पहचान गुप्त ही रखी जाएगी।

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