उत्तराखंड: भाजपा विधायक के ख़िलाफ़ थाने में तहरीर देने वाले उप-ज़िलाधिकारी का तबादला



देहरादून/उत्तरकाशी: उत्तराखंड के पुरोला से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दुर्गेश्वर लाल के खिलाफ पुलिस थाने में तहरीर देने वाले उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) सोहन सिंह सैनी का राज्य सरकार ने रविवार को तबादला कर दिया और उन्हें तत्काल पौड़ी जिले में गढ़वाल मंडल आयुक्त के कार्यालय से संबद्ध कर दिया है.

प्रदेश के कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से जारी एक आदेश में सैनी को तत्काल अपने वर्तमान पदभार से कार्यमुक्त होकर अपने नए तैनाती स्थल में कार्यभार ग्रहण करने को कहा गया है.

इससे पहले एसडीएम सैनी ने विधायक दुर्गेश्वर लाल के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी थी.

पुलिस ने बताया कि एसडीएम ने जनप्रतिनिधि दुर्गेश्वर लाल और उनके समर्थक कृष्णा सिंह के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए सोशल मीडिया में उनकी छवि धूमिल करने, उन्हें अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम के तहत फंसाने और जान से मारने की धमकी देने संबंधी आरोप लगाए थे.

पुलिस को दी गई तहरीर में सैनी ने आरोप लगाया है कि विधायक जान-बूझकर अपने समर्थक सिंह के माध्यम से सोशल मीडिया में उन्हें बदनाम कर रहे हैं, जिससे उनकी और विभाग की छवि धूमिल हो रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, एसडीएम ने कहा, ‘21 मई को पुरोला बाजार क्षेत्र में किया गया अतिक्रमण विरोधी अभियान विधायक को अच्छा नहीं लगा. उन्होंने मुझे उसी रात उनसे मिलने के लिए कहा, लेकिन मैं अगले दिन कार्यालय समय के दौरान उनसे मिलने गया. वहां न सिर्फ उनके समर्थकों ने मेरे साथ बदतमीजी की, विधायक ने खुद मुझसे उनकी इजाजत के बिना कोई कदम नहीं उठाने को कहा. तब से वे सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ फर्जी आरोप लगा रहे हैं.’

विधायक दुर्गेश्वर लाल ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा, ‘एसडीएम सैनी ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर एक निजी संपत्ति पर अवैध रूप से बुलडोजर चलवाया. इसके अलावा वह कई भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल रहे हैं. वह अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हैं और निरंकुश तरीके से व्यवहार करते हैं. उन्होंने लोगों को गुमराह करने के लिए मेरे खिलाफ यह फर्जी मामला दर्ज कराया है.’

​पुलिस तहरीर में लगाए गए सैनी के आरोपों के जवाब में विधायक ने दावा किया कि कई महीनों से शिकायतें आ रही थीं कि उनका आम जनता के साथ अच्छा रवैया नहीं है और बिना सुविधा शुल्क के तहसील में कोई भी काम नहीं हो रहा है.

विधायक ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार की शिकायत के बारे में उनके द्वारा बताए जाने पर भी एसडीएम ने कोई दिलचस्पी नहीं ली.

उन्होंने कहा, ‘इससे स्पष्ट है कि यदि वह निर्वाचित जनप्रतिनिधि के आदेशों की अवहेलना कर सकते हैं तो आम जनता की बात कैसे सुनते होंगे.’

लाल ने यह भी आरोप लगाया कि एसडीएम प्रत्येक शनिवार को भोजनावकाश के बाद कार्यक्षेत्र छोड़कर सरकारी गाड़ी से अपने घर चले जाते हैं, जो सरकारी धन का दुरुपयोग है. उन्होंने कहा कि इससे लोगों विशेषकर महिलाओं को अपने कार्य हेतु उनके आवास पर जाने में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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