इन बच्‍चों के लिए जहर का काम करता है दूध, पिलाने से पहले डॉक्‍टर की ये सलाह जान लें


​उम्र के हिसाब से दूध

एक साल से कम उम्र के बच्चे के लिए मां का दूध सबसे अच्छा होता है। डॉ पारेख बताते हैं कि आजकल फॉर्मूला दूध काफी अच्‍छा मिलता है इसलिए ब्रेस्‍टमिल्‍क के बाद यही पिलाना चाहिए। एक साल से कम उम्र के बच्चे को गाय का दूध नहीं देना चाहिए।

एक से दो साल की उम्र में आप अपने बच्चे को फुल फैट गाय का दूध दे सकते हैं, लेकिन दिन में ढाई से तीन कप से ज्यादा नहीं। यहां एक कप 250 मिली है।

दो से पांच साल की उम्र के लिए, कम वसा वाले स्किम दूध पर स्विच करें। बच्चा एक दिन में ज्यादा से ज्यादा दो से ढाई कप दूध पी सकता है।

जब आपका बच्चा पांच से नौ साल का हो जाए, तो एक दिन में ज्यादा से ज्यादा ढाई कप लो फैट स्किम मिल्क लें।

नौ से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए, एक दिन में दो कप से अधिक कम वसा वाला मलाई रहित दूध पीने की सलाह नहीं दी जाती है।

फोटो साभार : TOI

​दूध से बनी चीजें

दूध से बनी चीजें दो वर्ष की आयु के बाद के बच्चों के लिए दूध के विकल्‍प हो सकते हैं। आप पनीर, दही, पनीर और योगर्ट का विकल्प चुन सकते हैं। ये सभी बच्चों में दूध के दुष्प्रभावों के बिना प्रोटीन की पूर्ति करेंगे। आप इन उत्पादों से स्वादिष्ट व्यंजन भी बना सकते हैं और अपने बच्चे के भोजन में पोषण जोड़ सकते हैं।

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​गाय का दूध या प्‍लांट बेस्‍ड दूध

एक या दो साल की उम्र के बाद अगर आपके बच्‍चे को पॉश्‍चरीकृत गाय के दूध से दिक्‍कत हो रही है तो इसका मतलब है कि आपके बच्‍चे को गाय के दूध ये प्रोटीन एलर्जी या लैक्‍टोज इनटॉलरेंस है। बेबी को गाय का दूध कब पिलाएं यह भी पैरेंट्स को पता होना चाहिए। इन बच्‍चों को सोया मिल्‍क दे सकते हैं।

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​प्‍लांट बेस्‍ड मिल्‍क

प्‍लांट बेस्‍ड मिल्‍क जैसे कि सोया मिल्‍क, ओट मिल्‍क, बादाम मिल्‍क पांच साल से कम उम्र के बच्‍चों के लिए नहीं है।

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​ज्‍यादा दूध पीने के नुकसान

कई माता-पिता सोचते हैं कि दूध सब कुछ कर देता है। यह सच नहीं है। वास्तव में, अत्यधिक दूध पीने से आपके बच्चे की भूख सबसे पहले बाधित हो सकती है।

आपको पता होना चाहिए कि उम्र के हिसाब से बच्‍चे को कितना दूध देना है। बच्चे की उम्र के हिसाब से ज्‍यादा दूध का सेवन भोजन से आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। इससे उनकी अधिक खाने की इच्छा कम हो जाएगी। अत्यधिक दूध पीने से प्रोटीन लॉस एंटरोपैथी (पीएलई) जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं।

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