इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर केंद्रीय मंत्रियों की अहम बैठक, प्रोजेक्ट में तेजी लाने के उपायों पर चर्चा


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इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिये केंद्रीय मंत्रियों की अहम बैठक

नई दिल्ली। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ बुनियादी ढांचा विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इसमें राजमार्ग और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिये तेजी से वन एवं पर्यावरण मंजूरी देने का मामला शामिल है। गडकरी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में मौजूदा अंतर-मंत्रालयी मुद्दों के समाधान के लिए बुनियादी ढांचा समिति के नौवें समूह की बैठक की अध्यक्षता की। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संरक्षण को महत्व देते हुए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, और ‘कार्बन क्रेडिट’ की अवधारणा के समान एक ‘ट्री बैंक’ बनाने का सुझाव दिया। 

बैठक में नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी तथा कुछ राज्यों के प्रतिनिधि समेत अन्य शामिल हुए। वैष्णव ने रेलवे के बुनियादी ढांचा के लिये नई प्रौद्योगिकी और वित्तीय मॉडल के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इसके लिये सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने की पेशकश की। बयान के अनुसार मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वह परियोजनाओं को व्यवहारिक बनाने के लिए पहले से अधिग्रहण की गयी भूमि पर राजमार्गों के साथ रेलवे लाइन बिछाने की योजना पर काम करने की व्यवहार्यता की जांच करना चाहेंगे। 

बैठक के दौरान प्रमुख मुद्दा राजमार्गों और अन्य बुनियादी परियोजनाओं के संबंध में वन मंजूरी से संबंधित था। संबंधित अधिकारियों को इसके लिए प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। बयान के अनुसार रेलवे और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिये भूमि नीति और पर्यावरण तथा वन मंजूरी के लिए व्यापक दिशानिर्देश बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मंत्रियों ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी लाने के लिये विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाये गये मुद्दों पर विचार करने और उसके समाधान पर सहमति जतायी। बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, वित्त, बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग, पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन, रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, बिजली और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 





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