‘इंडिया’ को ‘हिंदिया’ में न बदले भाजपा, ‘हिंदी दिवस’ की जगह ‘भारतीय भाषा दिवस’ मनाएं: स्टालिन



बता दें कि बुधवार को शाह ने कहा था कि हिंदी के समृद्ध होने से देश की सभी स्थानीय भाषाएं समृद्ध होंगी व स्थानीय भाषाओं की समृद्धि से हिंदी समृद्ध होगी.

उन्होंने कहा था, ‘जो लोग ये अपप्रचार करते है कि हिंदी स्थानीय भाषाओं की प्रतिस्पर्धी भाषा है, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हिंदी प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि सभी स्थानीय भाषाओं की सखी है.’

गौरतलब है कि केंद्र द्वारा हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. यह पहली बार नहीं है जब स्टालिन ने अमित शाह द्वारा हिंदी भाषा को ‘थोपने’ को लेकर नाखुशी जाहिर की है.

इस साल अप्रैल में अमित शाह ने कहा था कि हिंदी, अंग्रेजी का विकल्प हो सकती है.

दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और यह निश्चित तौर पर हिंदी के महत्व को बढ़ाएगा.

गृह मंत्री ने कहा था कि अन्य भाषा वाले राज्यों के नागरिक जब आपस में संवाद करें तो वह ‘भारत की भाषा’ में हो.

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एमके स्टालिन ने कहा था कि शाह का हिंदी पर जोर भारत की ‘अखंडता और बहुलवाद’ के खिलाफ है और यह अभियान सफल नहीं होगा.

ज्ञात हो कि स्टालिन की पार्टी द्रमुक हिंदी विरोधी आंदोलनों में आगे रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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