आज भी मजबूती के साथ खड़ा है 420 साल पुराना बुलंद दरवाजा, बनाने में लगे थे करीबन 12 साल


उत्तर प्रदेश के आगरा आप कितनी बार घूमे होंगे? शायद कई बार, और यहां की कुछ ऐतिहासिक इमारतों को देखकर दिमाग में किस तरह के सवाल आएं हैं? कुछ इसी तरह के कि ऐसी खूबसूरती को आखिर किसने बनाया होगा या इन्हें क्यों बनवाया गया होगा। जैसे 7 अजूबों में से एक ताज महल को प्यार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन देखकर हर कोई यही सोचता है कि आखिर इसे कैसे बनाया गया होगा। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सिकरी में मौजूद एक ऐसी ही इमारत है, जिसकी वास्तुकला और निर्माण के तरीके को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। हम बात कर रहे हैं, विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा ‘बुलंद दरवाजा’ की। इसका निर्माण मुगल सम्राज्य के सबसे महान बादशाह माने जाने वाले अकबर ने 1602 में करवाया था। चलिए आपको इस इमारत से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं।
(सभी फोटो साभार : wikimedia commons)

बुलंद दरवाजे का इतिहास –

बुलंद दरवाजे को सम्राट अकबर ने गुजरात पर विजय प्राप्त करने की याद में 1602 ई. में इसका निर्माण करवाया था। आप आज भी प्रवेश द्वार के पूर्वी टॉर्न पर फ़ारसी में शिलालेख देख पाएंगे, जिनपर 1601 में दक्कन पर अकबर की विजय के बारे में बताते हैं। 42 सीढ़ियों के ऊपर मौजूद बुलंद दरवाजा 53.63 मीटर ऊंचा और 35 मीटर चौड़ा है। लाल बलुआ पत्थर से बने इसे विशाल दरवाजे को सफेद संगमरमर से सजाया गया है। दरवाजे के आगे और स्तम्भों पर कुरान की आयतें खुदी हुई हैं। आपको बता दें, दरवाजा आंगन और एक बड़ी जामा मस्जिद की ओर खुलता है। दरवाजा गुंबदों और मीनारों से सजा है।

अकबर के खुले विचारों प्रतीक है दरवाजा –

बुलंद दरवाजे पर बना पारसी शिलालेख अकबर के खुले विचारों का प्रतीक है। बुलंद दरवाजे के तोरण पर ईसा मसीह से जुड़ी बाइबल की कुछ पक्तियां भी लिखी हुई देखी जा सकती हैं। जिस तरह से बुलंद दरवाजे पर बाइबल की पक्तियों को देखा जाता है, ये उपस्थिति अकबर को धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक मानी जाती है। नजारों का अनुभव करने के लिए और विशाल दरवाजे को देखने के लिए यहां हजारों-लाखों में लोग आते हैं।

किवाड़ों पर घोड़े की नाल –

बुलंद दरवाजे के निर्माण में 12 साल का समय लग गया था। बुलंद दरवाजे में करीबन 400 साले पुराने आबनूस से बनी बड़ी किवाड़ें आज भी वैसे की वैसे ही हैं। शेख सलीम की मान्यता की वजह से कई यात्रियों द्वारा किवाड़ों पर लगाई हुई घोड़े की नाल देख सकते हैं।

शेख की दरगाह –

शेख की दरगाह में जाने के लिए इसी दरवाजे से गुजरना पड़ता है। बाईं ओर जामा मस्जिद है और सामने शेख की मज़ार है। मज़ार के पास उनके रिश्तेदारों की कब्रें भी देख सकते हैं। दरवाजे का उपयोग प्राचीन काल में फतेहपुर सिकरी के दक्षिण पूर्वी द्वार पर गार्ड्स को खड़ा करने के लिए होता था। बंदरगाह के पास से गुफा के प्रवेश द्वार तक एक छोटी ट्रेन भी चलती है, जिसका किराया 10 रुपए प्रति व्यक्ति है।

बुलंद दरवाजा कैसे पहुंचे –

आगरा में बुलंद दरवाजा तक पहुंचने के लिए, हवाई मार्ग से आपको आगरा हवाई अड्डे पर उतरना होगा, जो शहर के केंद्र से 7 किमी दूर है। दिल्ली फ्लाइट से आगरा पहुंचने में महज 40 मिनट लगते हैं। मुख्य रेलवे स्टेशन आगरा कैंट है। आगरा में मुख्य बस स्टैंड आगरा किला और ईदगाह बस स्टैंड हैं। कई लग्जरी टैक्सी या बसें हैं जो हर दिन आगरा तक जाती हैं।



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