अफ्रीकी मेंढक के सेल्स से बना रोबोट: अमेरिका में वैज्ञानिकों ने बनाया ‘लिविंग रोबोट’, ये खुद का ही रेप्लीका बनाने में सक्षम, समुद्र से माइक्रोप्लास्टिक का करेगा सफाया


6 घंटे पहले

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अमेरिका में वैज्ञानिकों की एक टीम ने मेंढक के सेल्स (कोशिकाओं) से जिंदा रोबोट बनाया है। इसका नाम ‘जेनोबोट’ रखा गया है। जेनोबोट की खासियत है कि यह खुद के रेप्लीका बनाने में सक्षम है। यह एक बायोलॉजिकल रोबोट है, यानी यह आनुवंशिक रूप से मेंढक के सेल्स से बना जीव है। मात्र 0.04 इंच बड़ा यह रोबोट साथी जेनोबोट्स के साथ मिलकर एक सेना की तरह काम करता है।

रोबोटिसिस्ट सैम क्रीगमैन का कहना है कि इस रोबोट को बनाने के पीछे उनका उद्देश्य जानवरों के विकास और उनमें रीप्रोडक्शन की प्रक्रिया को समझना था।

ऐसे बनाया गया लिविंग रोबोट

2020 में पहली बार डेवलप किया गया यह रोबोट केवल 0.04 इंच बड़ा है। अब यह और एडवांस हो गया है। इसे वर्मोंट यूनिवर्सिटी, टफ्ट्स यूनिवर्सिटी और हावर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। क्रीगमैन के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए अफ्रीका के मेंढकों के सेल्स का इस्तेमाल किया गया। इस मेंढक का नाम जेनोपस लाविस है। इसलिए इस रोबोट का नाम जेनोबोट रखा है।

BBC से बात करते हुए क्रीगमैन ने बताया कि उन्होंने रोबोट बनाने के लिए मेंढकों के सेल्स का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि लैब में उस समय वही मौजूद थे। मेंढक एक बार में हजारों अंडे देते हैं और उन्हीं अंडों से जरूरत के सेल्स निकाले गए।

शुरुआत में बहुत ही आसान रोबोट्स को बनाया गया। हार्ट सेल्स की मदद से ये चलने, कांट्रैक्ट और एक्सपैंड होने में सक्षम थे। इन्हें कम्प्युटर प्रोग्राम्स के जरिये डिजाइन किया गया था। नए रोबोट्स इससे काफी अलग हैं। इन्हें स्किन टिशूज से तैयार किया गया है। इनकी बॉडी छोटे-छोटे बालों से पूरी तरह ढकी है। ये बाल रोबोट को तैरने और दूसरे मूवमेंट करने में सहायता देते हैं।

जेनोबोट को बनाने के लिए अफ्रीका के मेंढकों के सेल्स का इस्तेमाल किया गया है।

जेनोबोट को बनाने के लिए अफ्रीका के मेंढकों के सेल्स का इस्तेमाल किया गया है।

रोबोट के पास है खुद की एनर्जी

क्रीगमैन कहते हैं कि जेनोबोट की अच्छी बात ये है कि इसके पास खुद की एनर्जी है। उसे ये एनर्जी मेंढक के जीवित सेल्स से मिली हुई है। इससे वो हफ्तों तक बिना चार्ज हुए काम कर सकता है।

जेनोबोट कैसे बनाता है अपना रेप्लीका

प्रोजेक्ट के दौरान पाया गया कि जेनोबोट जानवरों और पौधों से एकदम अलग प्रकार का प्रजनन करते हैं। अगर जेनोबोट बनाने वाली लैब डिश में कुछ स्टेम सेल्स छोड़ दिए जाएं, तो ये उनके गुच्छे बना देता है। फिर ये गुच्छे जेनोबोट के बच्चों का रूप ले लेते हैं। यानी ये पेरेंट जेनोबोट की तरह ही काम करने लगते हैं। स्टेम सेल्स ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को डेवलप करने की क्षमता होती है। इस कारण ये सेल्स जीवित जेनोबोट्स में तब्दील हो जाते हैं।

क्रीगमैन के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को कम्प्युटर द्वारा प्रोग्राम किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिकी खोज है। इससे पहले बायोलॉजी में इस प्रकार का सेल्फ-रेप्लीकेशन नहीं देखा गया।

जेनोबोट्स को कम्प्युटर प्रोग्राम्स के जरिये डिजाइन किया गया है।

जेनोबोट्स को कम्प्युटर प्रोग्राम्स के जरिये डिजाइन किया गया है।

रियल लाइफ में जेनोबोट का काम

क्रीगमैन के अनुसार, यह रोबोट छोटा, बायोडिग्रेडेबल और तैरने में सक्षम है। जेनोबोट्स मिलकर एक सेना की तरह काम करते हैं। इसे समुद्र से माइक्रोप्लास्टिक का सफाया करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। साथ ही, इसे मेडिकल फील्ड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आने वाले समय में वैज्ञानिक इसे मेंढक की जगह इंसान के सेल्स से तैयार कर सकते हैं।

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