अदालत ने गौतम नवलखा की ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा, उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत मौजूद


एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की याचिका को ख़ारिज करते हुए एनआईए की विशेष अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया आवेदक के ख़िलाफ़ मौजूद सबूत के मद्देनज़र वह ज़मानत के हक़दार नहीं हैं.

गौतम नवलखा (फोटो: यूट्यूब)

मुंबई: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने सोमवार को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ मामले में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं.

एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश राजेश जे. कटारिया ने नवलखा की जमानत याचिका को सोमवार को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं.

अदालत के आदेश की प्रति मंगलवार को साझा की गई.

अदालत ने कहा, ‘आरोप-पत्र पर गौर करने के बाद आवेदक के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने की बात सामने आई है. प्रथम दृष्टया कथित अपराध में आवेदक की संलिप्तता प्रतीत होती है.’

अदालत आदेश में कहा, ‘अपराध बेहद गंभीर है. अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया आवेदक के खिलाफ मौजूद सबूत के मद्देनजर वह जमानत के हकदार नहीं हैं.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इससे पहले मानवाधिकार कार्यकर्ता की जमानत याचिका का जोरदार विरोध करते हुए और उन्हें प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्य के रूप में वर्णित किया.

एनआईए के अनुसार, नवलखा प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्य हैं और वह इसके सदस्यों के साथ संपर्क में थे.

आतंकवाद रोधी एजेंसी ने दावा किया है कि उनके पास प्रतिबंधित समूह से संबंधित दस्तावेज भी मिले थे. उन्होंने छात्रों और अन्य लोगों के बीच माओवादियों के प्रति सहानुभूति पैदा भी पैदा की थी.

हालांकि, नवलखा की याचिका में कहा गया है कि एनआईए की चार्जशीट उन्हें एक बड़ी साजिश से जोड़ने में विफल रही है. इसमें कहा गया है कि नवलखा के खिलाफ किसी भी आतंकवादी कृत्य की योजना बनाने, तैयारी करने, खरीद, फंडिंग या कमीशन में शामिल होने का एक भी आरोप नहीं है.

याचिका के अनुसार, चार्जशीट में यह दिखाने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि नवलखा द्वारा कहीं भी बोले गए या लिखित शब्दों या किसी भी प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व द्वारा भारत सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष लाने का प्रयास किया गया है.

कार्यकर्ता की जमानत याचिका में दावा किया गया है कि वह हाई ब्लड प्रेशर और छाती में गांठ, गर्दन और पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित है.

मालूम हो कि मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने बीते 7 जुलाई को एल्गार परिषद मामले के आरोपी गौतम नवलखा और सागर गोरखे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जेल में मच्छरदानी का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी.

बीते मई महीने में गौतम नवलखा को तलोजा जेल के अधिकारियों ने ‘सुरक्षा को खतरा’ का हवाला देते हुए प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक पीजी वुडहाउस द्वारा लिखित एक किताब देने से इनकार कर दिया था.

69 वर्षीय नवलखा को मामले में शामिल होने के आरोप में 28 अगस्त, 2018 को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें शुरुआत में घर में नजरबंद रखा गया, लेकिन बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. वह पड़ोसी नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में बंद हैं.

यह मामला पुणे के शनिवारवाड़ा में 31 दिसंबर 2017 को हुए एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए कथित उकसावे वाले भाषणों से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि इन भाषणों से शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के समीप अगले दिन हिंसा भड़क गई थी.

पुणे पुलिस ने यह भी दावा किया था कि माओवादियों ने इस सम्मेलन का समर्थन किया था. एनआईए ने बाद में इस मामले की जांच संभाली और इसमें कई सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा शिक्षाविदों को आरोपी बनाया गया.

मामले के 16 आरोपियों में से केवल दो आरोपी वकील और अधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और तेलुगु कवि वरवरा राव फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. 13 अन्य अभी भी महाराष्ट्र की जेलों में बंद हैं.

आरोपियों में शामिल फादर स्टेन स्वामी की पांच जुलाई 2021 को अस्पताल में उस समय मौत हो गई थी, जब वह चिकित्सा के आधार पर जमानत का इंतजार कर रहे थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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