अगले साल के विधानसभा चुनाव से पहले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब का इस्तीफ़ा



देब बीते शुक्रवार को दिल्ली में थे. त्रिपुरा में पार्टी के मामलों की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से चर्चा के लिए देब बृहस्पतिवार को वहां पहुंचे थे.

कयास लगाए जा रहे थे कि त्रिपुरा की भाजपा इकाई में आपसी खींचतान चल रही है.

सूत्रों ने बताया कि उम्मीद है कि उप-मुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा मुख्यमंत्री का प्रभार लेंगे. वर्मा त्रिपुरा के राज परिवार से जुड़े हुए हैं.

राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

बिप्लब कुमार देब ने 2018 में पहली बार त्रिपुरा विधानसभा चुनाव लड़ा था और 9,549 मतों के अंतर से अगरतला के बनमालीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे. इसके बाद वह त्रिपुरा में भाजपा के पहले कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘पार्टी सबसे ऊपर है. मुझे पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने का प्रभार दिया था. मैंने पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री दोनों के रूप में त्रिपुरा की बेहतरी के लिए काम करने की कोशिश की. मुझे जो भी जिम्मेदारी दी गई, मैंने त्रिपुरा के लोगों के लिए न्याय करने की कोशिश की है.’

बिप्लब कुमार देब ने कहा कि भाजपा 2023 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए ‘जिम्मेदार कार्यकर्ताओं’ को पार्टी में लाने की योजना बना रही है.

उन्होंने कहा, ‘पार्टी संगठन जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को पार्टी में लाने की कोशिश कर रहा है. पार्टी संगठन होगा तभी सरकार रहेगी. अगर (भाजपा) सरकार को लंबे समय तक रहना है, मेरे जैसे कार्यकर्ताओं को पार्टी में काम करना चाहिए, इससे पार्टी को फायदा होगा.’

अपने अगले कार्यभार के बारे में पूछे जाने पर देब ने कहा कि वह किसी भी क्षमता में काम करने के लिए तैयार हैं, चाहे वह मुख्यमंत्री हो या ‘पन्ना प्रमुख’ (मतदाता सूची के एक पृष्ठ के प्रभारी व्यक्ति).

यह कदम कई लोगों के लिए एक आश्चर्य के रूप में सामने आया है, यहां तक कि उनके मंत्रिमंडल के मंत्रियों ने भी स्वीकार किया कि उनके पास ऐसा कोई पूर्व संकेत नहीं था कि वह ऐसा करेंगे.

देब के मंत्रिमंडल में एक मंत्री ने कहा, ‘हम हैरान हैं. मुझे नहीं पता कि उन्हें किस बात ने प्रेरित किया, लेकिन जाहिर तौर पर उनकी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा हुई थी. पार्टी की कुछ योजनाएं हो सकती हैं और हमें विश्वास है कि यह पार्टी के लिए अच्छा होगा.’

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा, ‘हमने अभी इसके बारे में सुना है. इस पर टिप्पणी करने के लिए हमारे पास अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है. हमें टिप्पणी करने से पहले पार्टी अध्यक्ष के साथ इस पर चर्चा करनी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि विधायक दल की बैठक के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं है.’

मुख्यमंत्री बिप्लब देब के इस्तीफे के बाद त्रिपुरा में नए नेता के चयन के लिए शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल की बैठक होगी.

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ नेता व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को नए नेता के चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है. दोनों नेता फिलहाल, अगरतला में हैं और वे विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेंगे.

इन दोनों नेताओं के अलावा भाजपा सांसद व त्रिपुरा के प्रभारी विनोद सोनकर भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे.

रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने पहले पार्टी सहयोगियों के विरोधों के बावजूद देब पर विश्वास जताया था. अगरतला में पार्टी के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक विनोद सोनकर की यात्रा के दौरान ‘बिप्लब हटाओ, त्रिपुरा बचाओ’ के नारे लगाए गए थे और अन्य मुद्दों के अलावा चीजों को संभालने के उनके तरीके के बारे में शिकायत करने के लिए भाजपा विधायक दिल्ली दौरे पर गए थे.

कथित तौर पर मुख्यमंत्री के साथ विवाद के कारण कैबिनेट में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रहे सुदीप रॉय बर्मन को उनके पद से हटा दिया गया था. रॉय बर्मन ने अंतत: एक अन्य विधायक आशीष कुमार साहा के साथ भाजपा छोड़ दी और इस साल जनवरी में कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)





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